रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति-2020

  • 06 Aug 2020

  • 3 अगस्त, 2020 को रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence- MoD) ने रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति (Defence Production and Export Promotion Policy-DPEPP)- 2020 का मसौदा ज़ारी किया।

उद्देश्य

  • रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीतिका उद्देश्य, वर्ष 2025 तक भारत को रक्षा वस्तुओं और सेवाओं में 35,000 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपये का कारोबार स्थापित करना है।
  • इसके साथ आयात पर निर्भरता कम करना तथा देशी प्रारूप और विकास के माध्यम से "मेक इन इंडिया" पहल को आगे बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और वैश्विक रक्षा क्षेत्र के अनुसार अपने उत्पादों का मूल्य निर्धारित करना है।
  • गुणवत्ता युक्त उत्पादों के साथ एयरोस्पेस, नौसेना जहाज निर्माण उद्योग सहित सशस्त्र बलों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक गतिशील, मजबूत और प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग विकसित करना है।
  • एक ऐसा तंत्र स्थापित करना जोनवाचार,अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहित करता है तथा एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देता है

प्रमुख विशेषताएँ

प्रबंधमें सुधार

  • नकारात्मक सूची के हथियारों को वर्ष-वार एक निर्धारित समय-सीमा के साथ अधिसूचित किया जाएगा जिससे तत्कालीन तारीख़ से उन वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
  • अधिग्रहण प्रक्रिया और अनुबंधों के प्रबंधन की सुविधा के लिए एक परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management Unit- PMU) स्थापित की जाएगी। यह इकाई अधिग्रहण की प्रक्रिया में विशेषज्ञता के साथ-साथ सैन्य निर्माण में निगरानी और तालमेल स्थापित करेगा।
  • लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से आगे बढ़कर स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकास और उत्पादन करना तथा स्वयं के डिज़ाइन व सेवाओं के दीर्घकालिक एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना (Long Term Integrated Perspective Plan-LTIPP) में अनुमानित प्रणालियों की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property- IP) के अधिकारके लक्ष्य से एक प्रौद्योगिकी मूल्यांकन सेल (Technology Assessment Cell-TAC) बनाया जाएगा।
  • प्रौद्योगिकी मूल्यांकन सेल देश में डिजाइन, विकास और उत्पादन के लिए औद्योगिक क्षमता का भी आकलन करेगा जिसमें आर्मर्ड व्हीकल, सबमरीन, फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, रडार जैसे विभिन्न प्रमुख प्रणालियों के उत्पादन के लिए री-इंजीनियरिंग शामिल है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME)/ स्टार्ट-अपका देशीकरण और उनका समर्थन

  • देशीकरण नीति का उद्देश्य भारत में निर्मित रक्षा उपकरण और मंच के लिए आयातित घटकों (मिश्रित और विशेष सामग्रियों सहित) को स्वदेशी बनाने के लिए एक उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र बनायाजाएगा। वर्ष 2025 तक ऐसी 5,000 वस्तुओं का देशीकरण होना प्रस्तावित है।

संसाधनों के आवंटन को सुधारना

  • कुल घरेलू ख़रीद का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र की वस्तुओं की खरीद में होताहै।
  • ऐसा मानाजा रहा है कि रक्षा हथियारों की ख़रीदवर्ष 2025 तक मौजूदा 70,000 करोड़ रुपये से दोगुनी होकर 1,40,000 करोड़ रुपये हो जाएगी, अतः घरेलू उद्योगों से ख़रीद को बढ़ाने की ज़रुरत है।

निवेश प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस

  • भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
  • विश्व बैंक की‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business-EODB)’ रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग से स्पष्ट है किभारत वर्ष के बाजार के आकार, जनसांख्यिकीय लाभांश और विविध कौशल वर्गों की उपलब्धता में सुधार हुआ है।
  • क्रय का एकाधिकार (Monopsony) होने के कारण रक्षा क्षेत्र में निवेश, माँग की नियमित आपूर्ति पर निर्भर है।
  • भारत पहले से ही एक बड़ा एयरोस्पेस बाजार है जिसमें लगातार यात्री यातायात और सैन्य व्यय में वृद्धि हो रही है, परिणामस्वरूप हवाई विमानों (स्थिर और घूमने वाले पंखों) की मांग बढ़ रही है।

नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D)

  • राष्ट्रव्यापी अनुसंधान एवं विकास की क्षमताओं का उपयोग करके, रक्षा सेवाओं से जुड़ी भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है और संबंधित प्रौद्योगिकियों में सूक्ष्म अंतर को संबोधित किया जाएगा।
  • रक्षा क्षेत्र में स्टार्ट-अप के लिए आवश्यक सैन्य और बुनियादी ढाँचा समर्थनप्रदान करने हेतु रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (Innovations for Defence Excellence-iDEX) का संचालन किया जाएगा।
  • नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और आयुध निर्माण बोर्ड (Ordnance Factory Board- OFB) में अधिक से अधिक संख्या में पेटेंट दाखिल करने के लिए मिशन रक्षाज्ञान शक्ति की शुरुआत की जाएगी।

गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना

  • उद्योगों के अंतराफलक के साथ एक आईटी मंच विकसित की जाएगी जो रक्षा वस्तुओं कीगुणवत्ता की गारंटी और उसके समयबद्ध वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी रखेगा।
  • सूक्ष्म, लघु और माध्यम उद्योग को और अधिक गुणवत्ता के प्रति जागरूक होने के लिए ’शून्य दोष, शून्य प्रभाव’ को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह उद्योग को वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (Directorate General of Aeronautical Quality Assurance- DGAQA) द्वारा सुगम प्रक्रिया के माध्यम से स्व-प्रमाणन में मदद करेगा।
  • आम परीक्षण सुविधाओं को स्थापित करने के लिए उद्योग को सहायता प्रदान किया जाएगा, जिससे रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (Defence Testing Infrastructure Scheme-DTIS) के माध्यम से परीक्षण बुनियादी ढाँचा बनाने का प्रयास किया जाएगा।

निर्यात प्रोत्साहन

  • यह विदेशों में स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समर्थित हैं।
  • उद्योग को समर्थन देने के लिए समन्वित कार्रवाई के माध्यम से रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक्सपोर्ट प्रमोशन सेल को और मजबूत और पेशेवर बनाया जाएगा।
  • प्रक्रिया को निर्बाध और समयबद्ध बनाने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग में पंक्तिबद्ध निर्यात निकासी प्रक्रिया (End-to-end export clearance process)को और उन्नत किया जाएगा।
  • ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (Open General Export Licence-OGEL) प्रशासन का उपयोग चयनित रक्षा उपकरणों और वस्तुओं के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाएगा ताकि मित्र देशों को पहचान हो सके।

आगे का रास्ता

  • रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति-2020,रक्षा मंत्रालय द्वारा परिकल्पित एक नई दिशा देने वाला अति महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो ‘आत्मानिभर भारत पैकेज’ के तहत आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को केंद्रित, संरचित और महत्वपूर्ण ज़ोर प्रदान करेगा।