भ्रष्टाचार सूचकांक में 91वें पायदान पर भारत
- 11 Feb 2026
10 फरवरी, 2026 को जारी भ्रष्टाचार बोध सूचकांक, 2025 (Corruption Perceptions Index, 2025) में भारत ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए 5 स्थान की छलांग लगाते हुए 182 देशों एवं क्षेत्रों में 91वाँ स्थान प्राप्त किया।
प्रमुख बिंदु
- भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक क्या है?: यह सूचकांक ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा प्रतिवर्ष जारी किया जाता है। इसमें देशों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा के आधार पर 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (अत्यंत स्वच्छ) के पैमाने पर रैंक प्रदान की जाती है।
- मूल्यांकन के मानदंड: रैंकिंग 182 देशों का विशेषज्ञ आकलन और विभिन्न शासन संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन करती है, जिससे यह आंका जाता है कि देश भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने और सार्वजनिक जवाबदेही बनाए रखने में कितने प्रभावी हैं।
- क्षेत्रीय प्रवृत्तियाँ: रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार-रोधी प्रयासों की धीमी प्रगति पर प्रकाश डाला गया है, जहाँ कई देशों में शासन एवं जवाबदेही से संबंधित मुद्दों पर जन-असंतोष बढ़ रहा है।
- वैश्विक परिदृश्य: वैश्विक औसत स्कोर घटकर 42 रह गया है, और दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम है, जो दर्शाता है कि भ्रष्टाचार विश्व स्तर पर अभी भी व्यापक और स्थायी चुनौती बना हुआ है।
- पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता: भारत उन देशों में शामिल है, जहाँ भ्रष्टाचार संबंधी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को व्यापक जोखिमों का सामना करना पड़ता है। मीडिया कर्मियों पर हमले पारदर्शिता और जवाबदेही तंत्र को कमजोर करते हैं।
- शीर्ष और निम्न प्रदर्शनकर्ता: डेनमार्क ने सर्वाधिक अंक प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान बरकरार रखा, उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर का स्थान रहा; जबकि दक्षिण सूडान और सोमालिया निम्नतम प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हैं।
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