औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
- 12 Feb 2026
11 फरवरी, 2026 को श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने लोक सभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया।
- इसका उद्देश्य पूर्ववर्ती श्रम कानूनों के निरस्तीकरण संबंधी प्रावधानों और प्रशासनिक क्रियान्वयन को स्पष्ट करना है।
मुख्य बिंदु
- संशोधन का उद्देश्य: यह विधेयक स्पष्ट करता है कि पूर्व श्रम कानूनों का निरस्तीकरण-प्रभाव संहिता की धारा 104 के तहत स्वतः लागू हुआ था।
- प्रतिस्थापित कानून: औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ने ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 को समेकित कर प्रतिस्थापित किया।
- कानूनी भ्रम से बचाव: यह संशोधन भविष्य में किसी भी गलत व्याख्या या जटिलता को रोकने हेतु भी लक्षित है।
- श्रम सुधार में भूमिका: औद्योगिक संबंध संहिता भारत के व्यापक श्रम सुधार ढांचे का प्रमुख अंग है, जो ट्रेड यूनियन, औद्योगिक सेवा-शर्तों और विवाद निपटान को समाहित करती है।
- प्रशासनिक स्पष्टता: संशोधन से श्रम संहिताओं का सुचारु कार्यान्वयन, औद्योगिक सौहार्द्र, श्रमिक संरक्षण और व्यवसाय सुगमता सुनिश्चित होगी।
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