आर्मी ऐंट्स की दो नई प्रजातियों की खोज
- 16 Feb 2026
फरवरी 2026 में कर्नाटक और ओडिशा के वैज्ञानिकों ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट क्षेत्र में आर्मी ऐंट्स (आक्रामक चींटियों) की दो नई प्रजातियों की खोज की।
प्रमुख बिंदु
- नई प्रजातियां: शोधकर्ताओं ने आर्मी ऐंट्स की दो नई प्रजातियों- एनीक्टस चित्तूरेंसिस (Aenictus chittoorensis) और एनीक्टस लंकामल्लेंसिस (Aenictus lankamallensis) की खोज आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में की।
- की-स्टोन की भूमिका: ये चींटियाँ वन पारिस्थितिक तंत्र में शीर्ष परभक्षी (keystone predators) के रूप में कार्य करती हैं। बड़ी संख्या में अकशेरुकी जीवों का भक्षण कर ये आर्थ्रोपोड जनसंख्या को नियंत्रित करती हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं।
- पारिस्थितिक महत्व: सामूहिक शिकार अभियानों के दौरान इनकी गतिविधियों के कारण अनेक कीट बाहर निकल आते हैं, जो पक्षियों, सरीसृपों और अन्य जीवों के लिए आहार बनते हैं। इस प्रकार ये पोषक तत्वों के चक्रण (nutrient cycling) में भी योगदान देती हैं।
- विशिष्ट व्यवहार एवं संरचना: इन चींटियों की जीवनशैली खानाबदोश (Nomadic) होती है। ये स्थायी बिल या घोंसले नहीं बनातीं, बल्कि श्रमिक चींटियों के शरीरों को आपस में जोड़कर एक अस्थायी जीवित ढांचे का निर्माण करती हैं, जिसे “बिवुआक” (Bivouac) कहा जाता है।
- विशिष्ट जैविक लक्षण: ये प्रजातियाँ दृष्टिहीन होती हैं, इनके जबडे अत्यधिक तीक्ष्ण होते हैं, ये संचार एवं मार्ग-निर्देशन के लिए फेरोमोन पर निर्भर करती हैं तथा समन्वित आक्रमणों के दौरान सुव्यवस्थित कतारों में संचालित होती हैं।
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