अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को मंत्रिमंडल की मंजूरी

  • 16 Feb 2026

13 फरवरी, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देशभर में बाजार-आधारित शहरी अवसंरचना विकास को गति देने और नगर प्रशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (Urban Challenge Fund–UCF) के शुभारंभ को स्वीकृति प्रदान की।

प्रमुख बिंदु

  • सुधार-प्रेरित शहरी विकास: यह कोष सुधार-आधारित और बाजार से जुड़े वित्तपोषण मॉडल के माध्यम से बड़े पैमाने पर शहरी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करेगा।
  • कार्यान्वयन अवधि एवं निवेश विस्तार: यह फंड वित्त वर्ष 2025–26 से 2030–31 तक संचालित होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 2033–34 तक बढ़ाया जा सकता है। इसके माध्यम से लगभग ₹4 लाख करोड़ के कुल शहरी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य है।
  • बाजार-आधारित वित्तपोषण मॉडल: परियोजनाओं की लागत का 25% केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, बशर्ते कम-से-कम 50% धनराशि नगर निगम बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से जुटाई जाए। शेष योगदान राज्यों और शहरी निकायों द्वारा किया जाएगा।
  • सुधार-आधारित प्रतिस्पर्धी चयन: परियोजनाओं का चयन ‘चैलेंज मोड’ के तहत होगा, जहाँ वित्तपोषण को प्रशासनिक सुधारों, चरणबद्ध लक्ष्यों और मापनीय प्रदर्शन संकेतकों से जोड़ा जाएगा।
  • शासन और डिजिटल रूपांतरण पर जोर: पहल का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय सुधार, डिजिटल प्रशासन, बेहतर नगरीय नियोजन और परिचालन दक्षता के माध्यम से सशक्त बनाना है।
  • कवरेज एवं पात्रता: यह कार्यक्रम 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, सभी राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों, प्रमुख औद्योगिक नगरों तथा क्रेडिट गारंटी घटक के माध्यम से छोटे शहरी निकायों को भी कवर करेगा।
  • टियर-II और टियर-III शहरों को बढ़ावा: यह योजना पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों सहित छोटे शहरी केंद्रों को बाजार तक पहुँच दिलाने और ₹20 करोड़ से अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने में सहायक होगी।
  • तीन प्रमुख परियोजना क्षेत्र: ‘विकास केंद्र के रूप में शहर’, ‘शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास’ तथा ‘जल एवं स्वच्छता’, इन 3 क्षेत्रों के अंतर्गत शहरी गतिशीलता, हरित अवसंरचना, विरासत संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं जल आपूर्ति प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाएगा।