हाइड्रोजन उत्पादन एवं सौर विलवणीकरण हेतु नई सामग्री विकसित
- 18 Mar 2026
मार्च 2026 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक नवीन सामग्री विकसित की, जो जल के विद्युत अपघटन के माध्यम से हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन करने के साथ-साथ सौर ऊर्जा आधारित विलवणीकरण भी संभव बनाती है।
मुख्य बिंदु
- द्वि-कार्यात्मक सामग्री: यह सामग्री हाइड्रोजन उत्पादन में सक्षम है तथा समुद्री जल के सौर विलवणीकरण में सहायक है।
- स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन: हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके दहन से केवल जल उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है।
- यह जीवाश्म ईंधनों का एक संभावित विकल्प है।
- उत्कृष्ट विद्युत-उत्प्रेरक प्रदर्शन: इस सामग्री ने हाइड्रोजन उत्क्रमण अभिक्रिया (HER) के लिए
- केवल 12 मिलीवोल्ट (mV) का अत्यल्प ओवरपोटेंशियल प्रदर्शित किया।
- यह पारंपरिक प्लैटिनम-ऑन-कार्बन (Pt/C) इलेक्ट्रोड से बेहतर प्रदर्शन है।
- MXene-आधारित उत्प्रेरक: शोध में MXenes का उपयोग किया गया, जो द्वि-आयामी सामग्री हैं तथा उच्च विद्युत चालकता और उत्प्रेरक क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।
- संरचनात्मक अभियांत्रिकी: वैज्ञानिकों ने अत्यंत-पतली रिबन जैसी संरचना विकसित की, जिससे सतह का क्षेत्रफल बढ़ा और आवेश परिवहन में सुधार हुआ।
- रुथेनियम डोपिंग: ऑक्सीजन रिक्त स्थानों में रुथेनियम परमाणुओं को जोड़ा गया। इससे धातु-आधार अंतःक्रिया मजबूत हुई और उत्प्रेरक दक्षता बढ़ी।
- दक्षता में सुधार: सामग्री ने सूर्य के प्रकाश में बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि इसमें प्रकाश-तापीय रूपांतरण (Photothermal Conversion) की उच्च क्षमता है। यह लंबे समय तक स्थिर (Stable) भी रही।
- सौर विलवणीकरण तकनीक:
- इस सामग्री को जेनस इवैपोरेटर (Janus Evaporator) में एकीकृत किया गया।
- यह एक तैरता हुआ उपकरण है, जो केवल जल की सतह को गर्म करता है।
- उच्च वाष्पीकरण दर: प्रणाली ने मानक सूर्य प्रकाश में लगभग 3.2 किग्रा/मी²/घंटा की वाष्पीकरण दर प्राप्त की।
- यह उपकरण 5 दिनों तक लगातार खारे पानी में कार्य करता रहा, बिना किसी लवण जमाव के।
- इससे प्राप्त जल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पेयजल था।
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