दत्तक माताओं को मातृत्व अवकाश का अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय
- 18 Mar 2026
17 मार्च, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की उस धारा को निरस्त कर दिया, जिसमें गोद लेने वाली माताओं के लिए मातृत्व अवकाश को केवल उन मामलों तक सीमित किया गया था जहाँ गोद लिया गया शिशु तीन माह से कम आयु का हो।
- न्यायालय ने कहा कि दत्तक माताओं को बच्चे की आयु की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- निरस्त किए गए प्रावधान: न्यायालय ने धारा 60(4) को असंवैधानिक घोषित किया। यह प्रावधान मातृत्व अवकाश को केवल उन मामलों तक सीमित करता था जहाँ बच्चा 3 महीने से कम आयु का हो।
- समानता का सिद्धांत: न्यायालय ने कहा कि दत्तक (गोद लेने वाली) माताओं के अधिकार और जिम्मेदारियाँ जैविक माताओं के समान हैं। अतः उन्हें समान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
- बाल-केंद्रित दृष्टिकोण: मातृत्व लाभ केवल जन्म से संबंधित नहीं, बल्कि बाल देखभाल की व्यापक आवश्यकताओं से जुड़ा है।
- सामाजिक कल्याण दृष्टिकोण: मातृत्व अवकाश एक सामाजिक कल्याण उपाय है, जिसका उद्देश्य माता-शिशु बंधन को मजबूत करना है।
- सरकार को निर्देश: न्यायालय ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश को भी सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में शामिल करने पर विचार करने को कहा।
- महत्व: यह निर्णय मातृत्व लाभों के दायरे का विस्तार करता है, दत्तक ग्रहण अधिकारों को मजबूत करता है तथा बाल कल्याण को सुदृढ़ करता है।
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