बाल मृत्यु दर में वैश्विक प्रगति का अग्रदूत भारत: UN रिपोर्ट
- 19 Mar 2026
17 मार्च, 2026 को प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (UNIGME) रिपोर्ट 2025 के अनुसार, बाल मृत्यु दर में वैश्विक कमी लाने में भारत एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरा है।
मुख्य बिंदु
- मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट: नवजात मृत्यु दर (NMR) में लगभग 70% की कमी (1990 में 57 → 2024 में 17)।
- 5 वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (U5MR) में लगभग 79% की कमी (1990 में 127 → 2024 में 27)।
- क्षेत्रीय प्रभाव (दक्षिण एशिया): 1990 के बाद से 5 वर्ष से कम आयु की मृत्यु में 76% की कमी।
- 2000 के बाद से 68% की कमी।
- 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर 2000 में 92 से घटकर 2024 में लगभग 32 (प्रति 1,000 जीवित जन्म)।
- प्रमुख कारण जिन पर नियंत्रण किया गया है: निमोनिया, डायरिया, मलेरिया तथा जन्म-संबंधी जटिलताएं, जो अधिकांशतः रोकी या उपचारित की जा सकती हैं।
- सरकारी प्रमुख हस्तक्षेप: सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP), संस्थागत नवजात देखभाल तथा नवजात एवं बाल्यावस्था रोगों का एकीकृत प्रबंधन (IMNCI)।
- नवजात एवं बाल स्वास्थ्य में प्रगति: वर्ष 2000 के बाद से नवजात मृत्यु में लगभग 60% की कमी।
- 1–59 माह आयु वर्ग में मृत्यु दर में 75% से अधिक की कमी।
- स्वास्थ्य तंत्र का सुदृढ़ीकरण: कुशल प्रसव सहायता (Skilled Birth Attendance) में वृद्धि।
- विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCUs) का विस्तार।
- प्रसव-पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल में सुधार।
- वैश्विक परिदृश्य में स्थिति: दक्षिण एशिया अब भी वैश्विक स्तर पर 5 वर्ष से कम आयु की लगभग 25% मृत्यु के लिए उत्तरदायी है, किंतु यहां गिरावट की दर सबसे तेज है, जिसमें भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
- उभरती चुनौतियां: कुल बाल मृत्यु में नवजात मृत्यु का बढ़ता अनुपात।
- समयपूर्व जन्म एवं जन्म-संबंधी जटिलताएं प्रमुख कारण।
- शहरी-ग्रामीण एवं राज्यों के बीच असमानताएं।
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