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लघु जलविद्युत विकास योजना को मंजूरी
- 19 Mar 2026
18 मार्च, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए लघु जलविद्युत विकास योजना [Small Hydro Power (SHP) Development Scheme] को स्वीकृति प्रदान की। इस योजना का उद्देश्य पर्यावरणीय रूप से सतत प्रौद्योगिकियों के माध्यम से स्वच्छ एवं विकेंद्रीकृत ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु
- योजना का परिव्यय एवं लक्ष्य: लगभग ₹2,584.60 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसके माध्यम से 1-25 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं द्वारा लगभग 1500 मेगावाट क्षमता विकसित की जाएगी।
- प्राथमिकता क्षेत्र: पर्वतीय एवं पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां जलविद्युत की अप्रयुक्त क्षमता अत्यधिक है।
- रन-ऑफ-द-रिवर प्रौद्योगिकी: इस योजना में प्राकृतिक नदी प्रवाह पर आधारित विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें बड़े बांधों की आवश्यकता नहीं होती। इससे विस्थापन एवं पर्यावरणीय क्षति न्यूनतम रहती है।
- वित्तीय सहायता:
- पूर्वोत्तर एवं सीमावर्ती क्षेत्र: ₹3.6 करोड़/मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (अधिकतम ₹30 करोड़ प्रति परियोजना)
- अन्य राज्य: ₹2.4 करोड़/मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (अधिकतम ₹20 करोड़ प्रति परियोजना)
- भविष्य की परियोजनाएं: लगभग 200 संभावित परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- निवेश एवं रोजगार: इस योजना से लगभग ₹15,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित करने तथा लगभग 51 लाख मानव-दिवस के रोजगार सृजन की संभावना है।
- लागत एवं दक्षता: विद्युत उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम (₹4.5–5.5 प्रति यूनिट) है, निर्माण अवधि कम होती है, तथा यह ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत विद्युतीकरण के लिए उपयुक्त है।
- राष्ट्रीय क्षमता: देश में लगभग 7,000 स्थलों की पहचान की गई है, जिनमें लघु जलविद्युत प्रौद्योगिकी के माध्यम से लगभग 21,000 मेगावाट क्षमता विकसित की जा सकती है।


