भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को मंजूरी

  • 19 Mar 2026

18 मार्च, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को स्वीकृति प्रदान की। ₹33,660 करोड़ के परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य देशभर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास कर विनिर्माण, निवेश तथा रोजगार को प्रोत्साहित करना है।

मुख्य बिंदु

  • लक्ष्य: विकसित भारत एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना तथा व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन करना।
  • औद्योगिक पार्कों का विकास: देशभर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।
    • प्रत्येक पार्क का आकार 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा।
    • इनका विकास राज्यों एवं निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में किया जाएगा।
  • विश्वस्तरीय अवसंरचना: सड़क, उपयोगिताएं, ड्रेनेज तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्रणालियों सहित रेडी-टू-यूज़ पारिस्थितिक तंत्र।
    • मूल्य संवर्धित सुविधाएं: कारखाना शेड, परीक्षण प्रयोगशालाएं, वेयरहाउसिंग।
    • सामाजिक अवसंरचना: श्रमिक आवास एवं अन्य सुविधाएं।
  • वित्तीय सहायता: मूलभूत अवसंरचना के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक सहायता।
    • बाह्य कनेक्टिविटी हेतु परियोजना लागत का 25% तक अतिरिक्त समर्थन।
  • लाभार्थी: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs), स्टार्टअप, बड़े विनिर्माता, वैश्विक निवेशक एवं स्थानीय समुदाय।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC), जो वर्तमान में 13 राज्यों में 20 परियोजनाओं का पर्यवेक्षण कर रहा है।
  • व्यवसाय करने में सुगमता (Ease of Doing Business): सिंगल-विंडो स्वीकृति एवं सरलीकृत अनुमोदन प्रक्रिया।
    • पूर्व-अनुमोदित भूमि एवं तैयार अवसंरचना से प्रवेश अवरोधों में कमी।
    • योजना से उत्पादन तक की प्रक्रिया में तीव्रता।
  • परियोजना चयन तंत्र: उच्च गुणवत्ता एवं निवेश-तत्पर प्रस्तावों को सुनिश्चित करने हेतु चैलेंज-आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
  • सतत एवं समेकित विकास: प्रधानमंत्री गतिशक्ति पहल के अनुरूप मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी।
    • हरित ऊर्जा एवं संसाधनों के सतत उपयोग पर बल।
  • आर्थिक प्रभाव: विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स एवं सेवा क्षेत्रों को प्रोत्साहन।
    • बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन।
    • क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं का सुदृढ़ीकरण।