आयकर नियम, 2026 अधिसूचित
- 21 Mar 2026
20 मार्च 2026 को भारत सरकार ने आयकर नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। ये नियम प्रत्यक्ष कराधान के अंतर्गत अनुपालन, रिपोर्टिंग एवं प्रक्रियात्मक ढांचे में व्यापक सुधार लाते हैं।
मुख्य बिंदु
- कार्यान्वयन ढांचा: ये नियम आयकर अधिनियम, 2025 को क्रियान्वित करते हैं तथा पुराने प्रक्रियात्मक तंत्रों को अद्यतन परिभाषाओं एवं अनुपालन व्यवस्थाओं से प्रतिस्थापित करते हैं।
- लाभांश (Dividend) नियम सख्त: कंपनियों को शेयर रजिस्टर बनाए रखना, आम बैठकें आयोजित करना तथा लाभांश का वितरण केवल भारत के भीतर करना अनिवार्य होगा, जिससे घरेलू निगरानी सुदृढ़ होगी।
- स्टॉक एक्सचेंज अनुपालन: एक्सचेंजों को 7 वर्षों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखना होगा, रिकॉर्ड हटाने पर प्रतिबंध रहेगा तथा संशोधित लेन-देन पर मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
- पूंजीगत लाभ में स्पष्टता: डिबेंचर रूपांतरण, सीमा-पार पुनर्गठन तथा आय प्रकटीकरण योजनाओं जैसे जटिल मामलों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं।
- जीरो कूपन बॉन्ड ढांचा: निर्गम से 3 माह पहले पूर्व-स्वीकृति, दोहरे निवेश-ग्रेड रेटिंग तथा निधि उपयोग हेतु निर्धारित समयसीमा अनिवार्य की गई है।
- सीमा-पार कराधान शक्तियां: कर प्राधिकरणों को गैर-निवासी आय का आकलन वैश्विक लाभ अनुपात या युक्तिसंगत मानकों के आधार पर करने की अनुमति दी गई है, जिससे कर अपवंचन पर नियंत्रण होगा।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था का कराधान: महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति (Significant Economic Presence: SEP) की सीमा ₹2 करोड़ के लेन-देन या 3 लाख उपयोगकर्ताओं पर निर्धारित की गई है, जिससे डिजिटल/रिमोट व्यवसायों पर कर लगाया जा सके।
- मूल्यांकन मानकों का मानकीकरण: सूचीबद्ध/असूचीबद्ध शेयरों, विदेशी संस्थाओं तथा साझेदारी हितों के लिए सूत्र-आधारित उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) नियम लागू किए गए हैं।
- ऑफशोर सौदों का कराधान: सीमा-पार लेन-देन में भारतीय परिसंपत्तियों से संबंधित आय की गणना हेतु निर्धारित सूत्र लागू किया गया है।
- व्यय कटौती का सरलीकरण: छूटों को एक मानकीकृत दृष्टिकोण के साथ सीमित किया गया है, जिसमें प्रत्यक्ष व्यय एवं निवेश मूल्य का 1% शामिल है।
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
राष्ट्रीय
- राजनीति और प्रशासन
- अवसंरचना
- आंतरिक सुरक्षा
- आदिवासियों से संबंधित मुद्दे
- कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- कार्यकारी और न्यायपालिका
- कार्यक्रम और योजनाएँ
- कृषि
- गरीबी और भूख
- जैवविविधता संरक्षण
- पर्यावरण
- पर्यावरण प्रदूषण, गिरावट और जलवायु परिवर्तन
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- बैंकिंग व वित्त
- भारत को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
- भारतीय अर्थव्यवस्था
- रक्षा और सुरक्षा
- राजव्यवस्था और शासन
- राजव्यवस्था और शासन
- रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- शिक्षा
- सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय
- स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे


