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  • 07 Apr 2026

30 मार्च, 2026 को, खान मंत्रालय ने खनिज रियायत नियमों में महत्वपूर्ण संशोधनों को अधिसूचित किया। इसके तहत अन्वेषण (Exploration) और उत्पादन को बढ़ाने के लिए आस-पास के क्षेत्रों और संबद्ध खनिजों को पट्टे में शामिल करने की अनुमति दी गई है।

मुख्य बिंदु

  • कानूनी आधार: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 [MMDR Amendment Act, 2025] के माध्यम से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन।
  • आस-पास के क्षेत्रों को शामिल करना: खनन पट्टे (ML) के लिए 10% तक और ‘कंपोजिट लाइसेंस’ (CL) के लिए 30% तक के विस्तार की अनुमति। यह गहराई में स्थित खनिजों के अधिक कुशल निष्कर्षण को सक्षम बनाएगा।
  • वित्तीय प्रावधान: नीलाम किए गए पट्टों पर जोड़े गए क्षेत्र के लिए 10% अतिरिक्त नीलामी प्रीमियम लगेगा, जबकि गैर-नीलाम पट्टों पर अतिरिक्त रॉयल्टी लागू होगी।
  • संबद्ध खनिजों का समावेश: यह संशोधन अन्य खनिजों (गौण खनिजों सहित) को भी साथ जोड़ने की अनुमति देता है, जिसके लिए राज्य सरकारों को 30 दिनों के भीतर अपनी मंजूरी देनी होगी।
  • महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रोत्साहन: महत्वपूर्ण, रणनीतिक या गहराई में स्थित खनिजों के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, जो इन कठिन संसाधनों के खनन को प्रोत्साहित करता है।
  • गौण खनिज पट्टे में सुधार: पट्टा देने से पहले G3 स्तर का अन्वेषण अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी प्रमुख खनिज की खोज होती है, तो उस क्षेत्र की नीलामी की जाएगी।
  • कैप्टिव खदानों से बिक्री: बिक्री सीमा पर लगे प्रतिबंध को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब कंपनियाँ अपनी ‘कैप्टिव’ (स्वयं की) ज़रूरतों को पूरा करने के बाद अतिरिक्त खनिजों को बाज़ार में बेच सकती हैं।
  • उद्देश्य: महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति बढ़ाना, ‘व्यापार में सुगमता’ (Ease of doing business) को बढ़ावा देना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मज़बूत करना।