महिलाओं की ऋण भागीदारी पर नीति आयोग की रिपोर्ट
- 09 Apr 2026
7 अप्रैल, 2026 को नीति आयोग ने “ऋण प्राप्त करने वाली महिलाओं से लेकर निर्माता तक: महिलाएं और भारत का विकसित होता ऋण बाजार” (From Borrowers to Builders: Women and India’s Evolving Credit Market) नामक शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट का द्वितीय संस्करण जारी किया, जिसमें औपचारिक ऋण प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है।
मुख्य बिंदु
- ऋण भागीदारी में वृद्धि: महिलाओं का क्रेडिट पोर्टफोलियो ₹76 लाख करोड़ (कुल क्रेडिट का 26%) तक पहुँच गया है, जो 2017 के ₹16 लाख करोड़ से लगभग 4.8 गुना अधिक है।
- उधारकर्ताओं की वृद्धि के रुझान: ‘क्रेडिट-सक्रिय’ (Credit-active) महिला उधारकर्ताओं की संख्या में 9% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की दर से वृद्धि हुई है। ऋण की पहुँच 19% से बढ़कर 36% हो गई है। फिर भी, लगभग 45 करोड़ महिलाएँ अभी भी ऋण-पात्र बनी हुई हैं।
- वित्तीय व्यवहार में बदलाव: महिलाओं का रुझान बुनियादी ऋण से आगे बढ़कर अब खुदरा (Retail) और व्यावसायिक ऋण की ओर हो रहा है, जो उनकी बेहतर वित्तीय क्षमता और आर्थिक एकीकरण को दर्शाता है।
- व्यावसायिक ऋण में वृद्धि: महिलाओं को दिए जाने वाले वाणिज्यिक ऋण में 31% CAGR (2022–2025) की दर से वृद्धि हुई, जो 17% की समग्र वाणिज्यिक ऋण वृद्धि से कहीं अधिक है। 19% माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ता खुदरा/वाणिज्यिक ऋण की ओर चले गए हैं।
- भौगोलिक विस्तार: दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी ऋण वृद्धि देखी गई है।
- ऋण उत्पादों के रुझान: व्यक्तिगत और स्वर्ण ऋण (Gold Loans) सबसे आम हैं। आवास ऋण बढ़ रहे हैं, जो महिलाओं के बीच बढ़ती संपत्ति के स्वामित्व को दर्शाता है।
- डिजिटलीकरण की भूमिका: मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर औपचारिक ऋण तक पहुँच में सुधार कर रहा है, जिससे अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हो रही है।
- अध्ययन का महत्व: यह रिपोर्ट लगभग 16 करोड़ महिलाओं के डेटा पर आधारित है, जो इसे महिलाओं की ऋण पहुँच के सबसे व्यापक आकलनों में से एक बनाता है। यह ‘महिला उद्यमिता मंच’ (WEP) की ‘फाइनेंसिंग विमेन कोलैबोरेटिव’ (FWC) पहल का मजबूती से समर्थन करता है।
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