मध्य पूर्व संघर्ष के बीच IMF ने वैश्विक विकास अनुमान घटाया
- 15 Apr 2026
14 अप्रैल, 2026 को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के कारण वैश्विक विकास अनुमानों को कम कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- विकास अनुमान: प्रतिकूल परिस्थितियों में वैश्विक विकास दर गिरकर 2.5% और अत्यधिक गंभीर स्थिति (मंदी के करीब) में 2.0% तक आ सकती है।
- कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव: प्रतिकूल स्थिति में तेल की कीमतें औसतन 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकती हैं, जबकि सबसे खराब स्थिति में यह 2026 में 110 डॉलर और 2027 में 125 डॉलर तक पहुँच सकती हैं।
- मुद्रास्फीति की चिंताएं: गंभीर स्थिति में वैश्विक मुद्रास्फीति 6% को पार कर सकती है, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती लागत व्यापक स्तर पर महंगाई को ट्रिगर कर सकती है।
- परिदृश्य विश्लेषण: IMF ने तीन परिदृश्यों की रूपरेखा दी है: संदर्भ, प्रतिकूल और गंभीर। लगातार बढ़ती बाधाएं वैश्विक दृष्टिकोण को ‘प्रतिकूल’ स्थिति की ओर धकेल रही हैं।
- क्षेत्रीय प्रभाव: जारी संघर्ष के कारण मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के विकास में भारी गिरावट आएगी और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उभरती अर्थव्यवस्थाएं अधिक गहराई से प्रभावित होंगी।
- प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का दृष्टिकोण (2026): अमेरिका की विकास दर 2.3%, यूरोज़ोन की 1.1%, चीन की 4.4% और जापान की 0.7% रहने का अनुमान है।
- भारत का शानदार प्रदर्शन: मजबूत घरेलू गति के बल पर 2026 और 2027 के लिए भारत के विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है।
- नीतिगत निहितार्थ: यदि मुद्रास्फीति बनी रहती है तो केंद्रीय बैंक अपनी नीतियां सख्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, सरकारों को सब्सिडी और राजकोषीय उपायों पर अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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