राजमार्ग सुरक्षा के लिए SC के अखिल भारतीय दिशा-निर्देश
- 21 Apr 2026
अप्रैल 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देशव्यापी दिशानिर्देश जारी किए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक शिथिलता या अवसंरचनात्मक खामियों के कारण एक्सप्रेसवे कभी भी ‘खतरे के गलियारे’ में परिवर्तित नहीं होने चाहिए।
मुख्य बिंदु
- मुख्य निर्देश: राजमार्गों पर भारी या वाणिज्यिक वाहनों की पार्किंग पर पूरी तरह प्रतिबंध (निर्धारित स्थानों को छोड़कर)। इसका उद्देश्य अवैध पार्किंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है।
- संवैधानिक आधार: न्यायालय ने सड़क सुरक्षा को सीधे अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन के अधिकार” से जोड़ा है और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के राज्य के कर्तव्य पर बल दिया है।
- पृष्ठभूमि: राजस्थान और तेलंगाना में हुई घातक दुर्घटनाओं के बाद न्यायालय ने स्वतः संज्ञान (Suo motu) लेते हुए यह कदम उठाया। इसने ढांचागत कमियों और व्यवस्थागत लापरवाही को उजागर किया है।
- तकनीकी प्रवर्तन: एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) का उपयोग और यातायात उल्लंघनों के लिए GPS-आधारित साक्ष्य व ई-चालान (eChallan) प्रणाली को लागू करने पर जोर दिया।
- बुनियादी ढांचागत उपाय: ट्रकों के रुकने के लिए “ले-बाय” (Lay-byes) और सड़क किनारे जनसुविधाओं का विकास। दुर्घटना वाले “ब्लैकस्पॉट्स” की पहचान और सुधार, साथ ही बेहतर रोशनी और निगरानी व्यवस्था।
- लगाए गए प्रतिबंध: राजमार्ग के “राइट ऑफ वे” (Right of Way) के भीतर नए ढाबों या भोजनालयों के निर्माण पर रोक और 60 दिनों के भीतर अवैध निर्माणों को हटाना होगा।
- प्रशासनिक निर्देश: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या PWD की मंजूरी के बिना कोई लाइसेंस या NOC जारी नहीं किया जाएगा। जिला स्तर पर “राजमार्ग सुरक्षा टास्क फोर्स” का गठन किया जाएगा।
- कार्यान्वयन की समय-सीमा: 60 दिनों के भीतर अनुपालन आवश्यक है, और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को 75 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
- संस्थागत समन्वय: इसमें NHAI, राज्य पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय निकायों की संयुक्त भूमिका होगी।
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