भारत–न्यूज़ीलैंड व्यापक मुक्त व्यापार समझौता

  • 28 Apr 2026

27 अप्रैल, 2026 को भारत और न्यूज़ीलैंड ने भारत मंडपम, नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक और व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार, सेवाओं, निवेश तथा मानव संसाधन गतिशीलता को व्यापक रूप से विस्तार देते हुए भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को सुदृढ़ करता है।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुँच: समझौते के लागू होते ही न्यूज़ीलैंड भारत के सभी निर्यात उत्पादों (जैसे वस्त्र, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, कालीन आदि) को पूर्णतः शुल्क-मुक्त प्रवेश प्रदान करेगा।
  • श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रोत्साहन: वस्त्र, चमड़ा, जूता उद्योग, रत्न एवं आभूषण तथा प्रसंस्कृत खाद्य जैसे क्षेत्रों में निर्यात वृद्धि के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है।
  • भारत की संतुलित उदारीकरण नीति: भारत ने 70.03% टैरिफ लाइनों को खोला है, जो द्विपक्षीय व्यापार के 95% मूल्य को कवर करती हैं, जबकि डेयरी, चीनी, खाद्य तेल, प्याज और मसालों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • कृषि सुरक्षा प्रावधान: सेब, कीवी और मैनुका शहद जैसे उत्पादों को टैरिफ दर कोटा (TRQ) तथा न्यूनतम आयात मूल्य के तहत अनुमति दी जाएगी, जिससे भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहें।
  • सेवा क्षेत्र का विस्तार: न्यूज़ीलैंड ने भारत के लिए 118 सेवा क्षेत्रों को खोल दिया है, जिनमें IT, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और दूरसंचार प्रमुख हैं।
  • गतिशीलता एवं वीज़ा प्रावधान: हर वर्ष अधिकतम 5,000 भारतीय पेशेवरों को अस्थायी रोजगार प्रवेश वीज़ा के तहत न्यूज़ीलैंड में काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, छात्र और वर्किंग हॉलिडे कार्यक्रमों का भी विस्तार किया गया है।
  • निवेश प्रतिबद्धता: न्यूज़ीलैंड ने भारत के कृषि, अवसंरचना, विनिर्माण, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकियों में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • फार्मा एवं चिकित्सा क्षेत्र में लाभ: भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए त्वरित नियामकीय मान्यता (fast-track approval) से अनुपालन बाधाएँ कम होंगी।
  • भौगोलिक संकेत (GI) एवं सांस्कृतिक सहयोग: न्यूज़ीलैंड GI संरक्षण को सुदृढ़ करेगा तथा आयुष, योग, पर्यटन और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा।
  • व्यापार सुगमता: कार्गो क्लीयरेंस सुधार, पेपरलेस प्रणाली और सिंगल-विंडो व्यवस्था से व्यापार लागत घटेगी और दक्षता बढ़ेगी।
  • रणनीतिक महत्व: यह समझौता हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करते हुए आपूर्ति शृंखला के लचीलापन और व्यापार विविधीकरण की रणनीति को आगे बढ़ाता है।