जलवायु परिवर्तन से वैश्विक वनाग्नि संकट गहराया

  • 13 May 2026

12 मई, 2026 को वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन तथा उभरती एल-नीनो (El Niño) परिस्थितियां अफ्रीका, एशिया एवं अन्य क्षेत्रों में रिकॉर्ड स्तर की वनाग्नि घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं, तथा आगामी महीनों में इसके और अधिक गंभीर होने की आशंका है।

मुख्य बिंदु

  • रिकॉर्ड स्तर की वनाग्नि गतिविधि: जनवरी से अप्रैल, 2026 के बीच विश्वभर में 15 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि वनाग्नि से प्रभावित हुई, जो पिछले रिकॉर्ड की तुलना में लगभग 20% अधिक है।
  • जलवायु परिवर्तन से संबंध: ‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ (World Weather Attribution) के शोधकर्ताओं ने इस चरम वनाग्नि मौसम के लिए मुख्यतः मानव-जनित जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है।
  • एल-नीनो का प्रभाव: वैज्ञानिकों ने चेताया कि एक प्रबल एल-नीनो घटना वैश्विक स्तर पर हीटवेव, सूखा तथा वनाग्नि जोखिमों को और अधिक तीव्र कर सकती है।
  • अफ्रीका सर्वाधिक प्रभावित: अफ्रीका में लगभग 8.5 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र जलकर प्रभावित हुआ, जो पिछले रिकॉर्ड से 23% अधिक है।
  • अफ्रीका में वनाग्नि के कारण: भारी वर्षा से अत्यधिक शुष्क परिस्थितियों में तीव्र परिवर्तन के कारण बड़ी मात्रा में सूखी वनस्पति तैयार हुई, जिसने सवाना क्षेत्रों की आग को और बढ़ाया।
  • एशिया में भीषण वनाग्नि: एशिया में लगभग 4.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, जो वर्ष 2014 के पिछले रिकॉर्ड से लगभग 40% अधिक है।
  • सर्वाधिक प्रभावित एशियाई देश: भारत, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस तथा चीन सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल रहे।
  • भविष्य के जोखिम क्षेत्र: वैज्ञानिकों ने वर्ष के उत्तरार्द्ध में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका तथा अमेज़न वर्षावन क्षेत्रों में वनाग्नि जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है।
  • एल-नीनो परिस्थितियां: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार मई, 2026 के दौरान एल-नीनो परिस्थितियां विकसित होने की संभावना है।
  • संभावित मौसम प्रभाव: एल-नीनो के कारण ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया तथा दक्षिणी एशिया में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका बढ़ सकती है।
  • वैश्विक तापमान में वृद्धि: वैज्ञानिकों ने चेताया कि जलवायु परिवर्तन एवं एल-नीनो के संयुक्त प्रभाव विश्वभर में अभूतपूर्व मौसमीय चरम स्थितियां उत्पन्न कर सकते हैं।
  • वैज्ञानिकों की चिंता: शोधकर्ताओं के अनुसार यदि प्रबल एल-नीनो परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो वर्ष 2026 हाल के इतिहास के सबसे गंभीर वनाग्नि मौसमों में से एक बन सकता है।