भारत में किम्बर्ले प्रोसेस की अंतरसत्रीय बैठक का आयोजन
- 13 May 2026
11 मई, 2026 को भारत ने अपनी अध्यक्षता में मुंबई में ‘किम्बर्ले प्रोसेस की अंतरसत्रीय बैठक 2026’ (Kimberley Process Intersessional Meeting 2026) का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु
- चार दिवसीय बैठक: 11 से 14 मई, 2026 तक आयोजित इस बैठक में सहभागी देशों, उद्योग संगठनों तथा नागरिक समाज समूहों के प्रतिनिधि, जिम्मेदार और टिकाऊ हीरा व्यापार पर चर्चा के लिए एकत्र हो रहे हैं।
- मुख्य फोकस: चर्चाओं का केंद्र वैश्विक प्राकृतिक हीरा मूल्य श्रृंखला में निगरानी, अनुपालन तथा उपभोक्ता विश्वास को सुदृढ़ करना है।
- उभरती चुनौतियों पर चर्चा: इस बैठक में प्रतिभागी हीरा उद्योग से जुड़ी उभरती चुनौतियों तथा पारदर्शिता एवं जिम्मेदार स्रोत-प्राप्ति (Responsible Sourcing) हेतु सहयोगात्मक उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
- भारत की अध्यक्षता की थीम: वर्ष 2026 के लिए भारत की अध्यक्षता की थीम "3Cs" - विश्वसनीयता (credibility), अनुपालन (compliance) और उपभोक्ता विश्वास (consumer confidence) पर आधारित है।
- किम्बर्ले प्रोसेस का गठन: वैध व्यापार में ‘संघर्षरत क्षेत्रों के हीरों (conflict diamonds) के प्रवेश को रोकने हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा के वर्ष 2000 के प्रस्ताव 55/56 के बाद ‘किम्बर्ले प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम’ की स्थापना की गई थी।
- सदस्यता: वर्तमान में किम्बर्ले प्रोसेस में 60 प्रतिभागी शामिल हैं, जो 86 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यूरोपीय संघ इसमें एकल समूह (Single Bloc) के रूप में भाग लेता है।
कंफ्लिक्ट डायमंड्स क्या हैं?
- कंफ्लिक्ट डायमंड्स (Conflict Diamonds) जिन्हें “ब्लड डायमंड्स” भी कहते हैं, वे हीरे हैं जो युद्ध-क्षेत्रों में खनन किए जाते हैं और विद्रोही गुटों या उनके सहयोगियों द्वारा बेचे जाते हैं, ताकि वैध सरकारों के खिलाफ सैन्य अभियानों को फंड किया जा सके।
- मुख्यतः अफ्रीकी देशों - सिएरा लियोन, अंगोला, लाइबेरिया, DRC (कांगो), और कोट डी'आइवर आदि में इनका खनन होता है।
- विद्रोही संगठन इन हीरों को बेचकर हथियार, गोला-बारूद और सैनिकों की भर्ती के लिए पैसा जुटाते हैं। इससे गृह युद्ध और नरसंहार जैसी स्थितियाँ लंबे समय तक चलती रहती हैं।
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