गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के चुनावी कदम को भारत ने अवैध क्यों माना है?

  • 06 Jun 2026

भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए “आम चुनाव” कराने के पाकिस्तान के निर्णय को अवैध माना है, क्योंकि उसका स्पष्ट रूप से मानना है कि यह क्षेत्र पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और वहां की किसी भी राजनीतिक या चुनावी प्रक्रिया से उसकी संप्रभुता या कानूनी स्थिति प्रभावित नहीं हो सकती। भारत ने अपना यह विरोध 5 जून, 2026 को दर्ज किया।

भारत के अनुसार

  • गिलगित-बाल्टिस्तान सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य अंग हैं।
  • इसका विधिक आधार 1947 में हस्ताक्षरित विलय पत्र है, जिसे भारत अंतिम और बाध्यकारी मानता है।
  • भारत का यह भी कहना है कि अवैध रूप से कब्जाए गए किसी भी क्षेत्र में चुनाव कराकर उस भूमि की कानूनी स्थिति को बदला नहीं जा सकता।
  • पाकिस्तान द्वारा ऐसे चुनाव कराना एकतरफा राजनीतिक कदम है।
  • यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को बदल नहीं सकता।

पाकिस्तान-नियंत्रित क्षेत्रों में स्थिति संबंधी चिंताएँ

  • भारत ने इन क्षेत्रों में कई गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया है
  • oमानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएँ।
  • oराजनीतिक दमन की स्थिति।
  • oआर्थिक शोषण की समस्याएँ।
  • oमौलिक स्वतंत्रताओं का अभाव।

कूटनीतिक आधार

  • भारत का यह रुख उसके स्थायी विदेश नीति सिद्धांत पर आधारित है।
  • इसके तहत वह जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी एकतरफा राजनीतिक या चुनावी प्रक्रिया को वैधता प्रदान नहीं करता।

निष्कर्ष
गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का यह चुनावी कदम केवल एक राजनीतिक छलावा है; एक ऐसा प्रयास जो अवैध कब्जे को लोकतांत्रिक वैधता का मुखौटा पहनाने की कोशिश करता है। भारत का दृष्टिकोण न केवल ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से सुदृढ़ है, बल्कि यह उसकी संप्रभुता के प्रति अटल प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। जब तक यह भूमि पाकिस्तान के अनधिकृत नियंत्रण में है, वहाँ कराया गया कोई भी चुनाव अंतरराष्ट्रीय दृष्टि में न वैध है, न मान्य।