विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI ने कौन-से प्रमुख कदम उठाए हैं?
- 06 Jun 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने तथा भारतीय वित्तीय बाजारों में विदेशी भागीदारी बढ़ाने के लिए निवेश नियमों को उदार बनाया है, सरकारी प्रतिभूतियों तक विदेशी पहुंच का विस्तार किया है तथा विदेशी मुद्रा संसाधन जुटाने को प्रोत्साहित करने वाले नए उपायों की घोषणा की है।
हालिया घटनाक्रम
- 5 जून, 2026 को RBI ने विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की।
NRI और OCI निवेश
- गैर-निवासी भारतीय (NRI) और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के लिए भारतीय शेयर बाजारों में सूचीबद्ध इक्विटी साधनों में निवेश की सीमा बढ़ाई गई।
- इसके लिए SEBI के साथ अलग पंजीकरण की आवश्यकता समाप्त की गई।
सरकारी प्रतिभूतियों तक पहुंच
- फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) का दायरा बढ़ाया गया।
- 15, 30 और 40 वर्ष की नई सरकारी प्रतिभूतियों को इसमें शामिल किया गया।
विदेशी मुद्रा संसाधनों को प्रोत्साहन
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECBs) के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की गई।
- 3 से 5 वर्ष की परिपक्वता वाली नई विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक [FCNR(B)] जमा राशि जुटाने वाले बैंकों को हेजिंग लागत संबंधी सुविधा प्रदान की गई।
निष्कर्ष
RBI के ये कदम विदेशी निवेशकों के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाने, विदेशी मुद्रा प्रवाह को सुदृढ़ करने तथा देश की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
राष्ट्रीय
- राजनीति और प्रशासन
- अवसंरचना
- आंतरिक सुरक्षा
- आदिवासियों से संबंधित मुद्दे
- कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- कार्यकारी और न्यायपालिका
- कार्यक्रम और योजनाएँ
- कृषि
- गरीबी और भूख
- जैवविविधता संरक्षण
- पर्यावरण
- पर्यावरण प्रदूषण, गिरावट और जलवायु परिवर्तन
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- बैंकिंग व वित्त
- भारत को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
- भारतीय अर्थव्यवस्था
- रक्षा और सुरक्षा
- राजव्यवस्था और शासन
- राजव्यवस्था और शासन
- रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- शिक्षा
- सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय
- स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे


