सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के योगदान को दी मान्यता

  • 19 Jun 2026

जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में गृहिणियों को “राष्ट्र निर्माता” एवं “आर्थिक इकाई” के रूप में मान्यता देते हुए, किसी दुर्घटना में मृत गृहणियों से जुड़े मोटर दुर्घटना दावों में निष्पक्ष मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए ‘घरेलू देखभाल कार्य की हानि’ (Loss of Domestic Care) नामक एक नया मुआवजा घटक पेश किया है।

मुख्य बिंदु

  • आधारभूत मुआवजा: नए मुआवजा घटक के अंतर्गत क्षतिपूर्ति की गणना के लिए ₹30,000 की एक आधारभूत काल्पनिक मासिक आय (Notional Monthly Income) निर्धारित की गई है।
  • पात्रता की शर्तें: यह मुआवजा उन मामलों में लागू होगा, जहाँ -
    • गृहिणी परिवार एवं घरेलू प्रबंधन में योगदान देती थी।
    • बच्चों को मातृ देखभाल एवं मार्गदर्शन की हानि हुई हो।
    • पति अथवा माता-पिता घरेलू सहयोग से वंचित हुए हों।
  • भविष्य में संशोधन: ₹30,000 के इस मानक में प्रत्येक तीन वर्ष पर 10% की वृद्धि की जाएगी, ताकि यह कंसोर्टियम मुआवजे में होने वाले संशोधनों के अनुरूप बना रहे।
  • कार्यरत गृहिणियों के लिए अतिरिक्त लाभ: यदि मृत गृहणी कहीं नौकरी/रोजगार भी करती थी, तो मुआवजे की गणना करते समय उसकी वास्तविक आय में यह ₹30,000 अतिरिक्त रूप से जोड़े जाएंगे।