स्लोवाकिया में प्रदर्शित हुई राजस्थान की थेवा कला
- 24 Jun 2026
जून 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान राजस्थान की पारंपरिक थेवा कला (Thewa Art) से निर्मित कफ़लिंक (कमीज़ की आस्तीन के बटन) स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को भेंट किए गए, जिससे प्रतापगढ़ की इस शताब्दियों पुरानी हस्तकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।
- थेवा कला क्या है? थेवा राजस्थान की एक पारंपरिक हस्तकला है, जो रंगीन कांच पर की जाने वाली बारीक स्वर्ण नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है और राज्य की विशिष्ट कलाओं में से एक मानी जाती है।
- उद्गम स्थल: इस कला की उत्पत्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में हुई थी तथा इसे वहां के शिल्पकार परिवारों द्वारा लगभग 400 वर्षों से संरक्षित एवं विकसित किया जा रहा है।
- शिल्पकला की विशेषता: थेवा कला में 23 कैरेट सोने से अत्यंत सूक्ष्म एवं आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बहुरंगी कांच की सतह पर जड़ित किया जाता है।
- GI टैग: प्रतापगढ़ की थेवा कला को वर्ष 2015 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया था, जिससे इसकी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत एवं उत्कृष्ट शिल्पकौशल को औपचारिक मान्यता मिली।
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