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बहु राज्य सहकारी समिति अधिनियम 2002 में संशोधन का निर्णय


19 दिसंबर, 2021 को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि केंद्र ने ‘बहु राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002’ में खामियों को दूर करने के लिए संशोधन करने का निर्णय लिया है।

महत्वपूर्ण तथ्य: चीनी, दुग्ध, बैंक, दुग्ध संघ आदि कई सहकारी समितियाँ हैं, जिनके सदस्य और संचालन के क्षेत्र एक से अधिक राज्यों में फैले हुए हैं। ऐसी सहकारी समितियों को नियंत्रित करने के लिए यह अधिनियम पारित किया गया था।

  • इस कानून के लागू होने के बाद से, 1,479 ऐसी समितियों को पंजीकृत किया गया है, जिनमें से 9 का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 567 समितियां है, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 147 और नई दिल्ली में 133 हैं।
  • सबसे अधिक पंजीकृत समितियों में क्रेडिट समितियां (610) हैं, इसके बाद कृषि आधारित (जिसमें चीनी मिलें, कताई मिल आदि शामिल हैं) समितियां 244 हैं। 96 बहु राज्य सहकारी डेयरियांसमितियां और 66 बहुराज्य सहकारी बैंक समितियां हैं।

सरकार अधिनियम में संशोधन की योजना क्यों बना रही है? ऐसी समितियों में दिन-प्रतिदिन के कामकाज में सरकारी नियंत्रण का स्पष्ट अभाव है। राज्य सहकारी समितियों के विपरीत, जिन्हें राज्य पंजीयक (state registrar) को कई रिपोर्ट जमा करनी होती हैं, बहु राज्य सहकारी समितियों को इसकी आवश्यकता नहीं होती है।