पीआईबी न्यूज आर्थिक

श्वेत वस्तुओं के लिए उत्पादन से जुडी प्रोत्साहन योजना


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 अप्रैल, 2021 को 6,238 करोड़ रुपये के बजट-आवंटन के साथ ‘श्वेत वस्तुओं (एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट) के लिए उत्पादन से जुडी प्रोत्साहन योजना’ (Production-Linked Incentive Schemes for White Goods) को मंजूरी प्रदान की।

उद्देश्य: क्षेत्र आधारित अक्षमताओं को दूर करके, बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था के निर्माण और दक्षता को सुनिश्चित करते हुए भारत में विनिर्माण को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

महत्वपूर्ण तथ्य: योजना के तहत एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को अगले 5 वर्षों के दौरान भारत में निर्मित वस्तुओं की वृद्धिमान बिक्री (incremental sales) पर 4% से 6% की दर से प्रोत्साहन दिया जायेगा।

  • योजना के लिए कंपनियों का चयन कल-पुर्जों के निर्माण या उपकरण के हिस्से के निर्माण को प्रोत्साहन देने के आधार पर किया जायेगा,तैयार वस्तुओं को सिर्फ जोड़ने (असेम्बल) के लिए प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा।

अनुमानित लाभ: इस पीएलआई योजना से अगले 5 वर्षों के दौरान 7,920 करोड़ रुपये का वृद्धिमान निवेश; 1,68,000 करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन तथा 64,400 करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं का निर्यात होगा।

  • 49,300 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष राजस्व प्राप्ति होगी एवं रोजगार के 4 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष अवसर सृजित होंगे।

पीआईबी न्यूज राष्ट्रीय

जनजातीय स्वास्थ्य सहयोग के लिए ‘अनामय’ योजना


केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा के साथ मिलकर 7 अप्रैल, 2021 को जनजातीय स्वास्थ्य सहयोग के लिए ‘अनामय’ योजना (Tribal Health Collaborative Anamaya) की शुरुआत की।

महत्वपूर्ण तथ्य: ‘अनामय’ पीरामल फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित बहु-हितधारक पहल है।

  • ‘अनामय’ योजना भारत के जनजातीय समुदाय के ‘स्वास्थ्य और पोषण’ की स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी एजेंसियों और संगठनों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को एक मंच पर लेकर आएगी।
  • इस सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्रालय कई गतिविधियों पर काम करेगा जैसे- जनजातीय स्वास्थ्य में नीतिगत पहल करने के लिए ‘राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य परिषद’ की स्थापना;जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की निगरानी के लिए ‘स्वास्थ्य इकाइयों’ (Health Cell) की स्थापना; तथा जनजातीय स्वास्थ्य कार्य योजना को लागू करने के लिए प्रभावशाली तंत्र तैयार करना।

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महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का प्रस्ताव


ओडिशा सरकार ने मार्च 2021 में राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित महेंद्रगिरि में राज्य का दूसरा बायोस्फीयर रिजर्व का प्रस्ताव किया है।

महत्वपूर्ण तथ्य: महेंद्रगिरि एक समृद्ध जैव विविधता वाला पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र है। प्रस्तावित महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का क्षेत्र लगभग 470,955 हेक्टेयर है और यह पूर्वी घाट में गजपति और गंजम जिलों में फैला हुआ है।

  • विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह (particularly vulnerable tribal group) 'सौरा' (Soura) लोग महेंद्रगिरि के निवासी हैं।
  • प्रस्तावित महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिजर्व की रिपोर्ट के अनुसार, पौधों की लगभग 1,358 प्रजातियों के साथ महेंद्रगिरि में मौजूद समृद्ध वनस्पति ओडिशा की 40% वनस्पतियों का प्रतिनिधित्त्व करती है।
  • इसके अलावा महेंद्रगिरि में जानवरों की 388 प्रजातियाँ मौजूद हैं, जिनमें स्तनधारियों की 27 प्रजातियाँ, पक्षियों की 165 प्रजातियाँ, साँपों की 23 प्रजातियाँ, उभयचरों की 15 प्रजातियाँ, कछुओं की तीन प्रजातियाँ और छिपकलियों की 19 प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • 5,569 वर्ग किलोमीटर में फैला सिमलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व ओडिशा का पहला बायोस्फीयर रिजर्व है, जिसे 20 मई, 1996 को अधिसूचित किया गया था।

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भारत और जापान शैक्षणिक व अनुसंधान सहयोग


7 अप्रैल, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत और जापान शैक्षणिक व अनुसंधान सहयोग और परस्पर आदान-प्रदान से जुड़े एक समझौता ज्ञापन की जानकारी दी गई।

महत्वपूर्ण तथ्य: भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की ‘राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला’ (National Atmospheric Research Laboratory- NARL) और जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के ‘रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल ह्यूमनोस्फीयर’ (Research Institute for Sustainable Humanosphere- RISH) के बीच नवंबर 2020 में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे।

  • इसके तहत तहत दोनों देश वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा समन्वयात्मक वैज्ञानिक प्रयोगों एवं अभियानों (collaborative scientific experiments/campaigns) और प्रतिमान अध्ययनों (modelling studies) से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।
  • समझौते के माध्यम से जापान के शिगराकी में मध्यम और ऊपरी वायुमंडलीय रडार, इंडोनेशिया के कोतोताबंग में भूमध्यवर्ती वायुमंडलीय रडार (Equatorial Atmosphere Radar) और RISH में उपलब्ध अनुपूरक उपकरणों के साथ-साथ NARL में ‘मध्यमंडल-समतापमंडल-क्षोभमंडल रडार’ एवं उपलब्ध अनुपूरक उपकरणों जैसी सुविधाओं का परस्पर उपयोग किया जा सकेगा।
  • NARLऔर RISH के बीच वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के साथ-साथ वैज्ञानिकों के परस्पर आदान-प्रदान में सहयोग की व्यवस्था को एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से 2008 में गठित किया गया था।

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डॉ. हरेकृष्ण महताब द्वारा लिखित पुस्तक 'ओडिशा इतिहस' का हिंदी अनुवाद जारी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अप्रैल, 2021 को 'उत्कल केशरी' डॉ. हरेकृष्ण महताब द्वारा लिखित पुस्तक 'ओडिशा इतिहस' का हिंदी अनुवाद जारी किया।

  • अब तक ओडिया और अंग्रेजी में उपलब्ध पुस्तक का हिंदी में अनुवाद शंकरलाल पुरोहित ने किया है।
  • डॉ. हरेकृष्ण महताब भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण शख्सियत थे। वे 1946 से 1950 तक और 1956 से 1961 तक ओडिशा के मुख्यमंत्री पद पर भी रहे। उन्होंने अहमदनगर किला जेल में 'ओडिशा इतिहस' पुस्तक लिखी, जहाँ उन्हें 1942 से 45 के दौरान दो साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया था।

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मधुक्रांति पोर्टल


कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 7 अप्रैल, 2021 नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के ‘मधुक्रांति पोर्टल’ (Madhukranti portal) का शुभारंभ किया।

  • इस पोर्टल को शहद और अन्य मधु उत्पादों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। यह शहद की गुणवत्ता और मिलावट के स्रोत की जांच करने में भी मदद करेगा।
  • यह पोर्टल, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और हनी मिशन के तहत गठित राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की पहल है। इस परियोजना हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास के लिए ‘राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड’ ने तकनीकी और बैंकिंग सहयोगी ‘इंडियन बैंक’ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • कृषि मंत्री ने नेफेड के स्टोरों में शहद की बिक्री के लिए समर्पित विशेष रूप से डिजाइन किया गया स्थान ‘हनी कॉर्नर’ का भी शुभारंभ किया।

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अर्गिरिया शरदचंद्रजी


अप्रैल 2021 में दक्षिण महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में फूलों के पौधों की एक नयी प्रजाति खोजी गई, जिसका नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के नाम पर रखा गया है।

  • केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में पवार के योगदान को देखते हुए इस प्रजाति का नाम 'अर्गिरिया शरदचंद्रजी' (Argyreia sharadchandrajii) रखा गया है।
  • कोल्हापुर जिला प्रसिद्ध पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी क्षेत्र में आता है, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए मशहूर है।
  • ये प्रजातियां केवल एशियाई देशों में पाई जाती है। 40 उप-प्रजातियों में से 17 उप-प्रजातियां भारत की स्थानीय हैं। रामलिंग पहाड़ियों में आलमप्रभु पवित्र उपवन (Alamprabhu Sacred Grove) में यह 18वीं उप-प्रजाति खोजी गई है।
  • इस पौधे में जुलाई से सितंबर के बीच फूल लगते हैं और फल की अवधि दिसंबर तक रहती है।

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विश्व स्वास्थ्य दिवस


7 अप्रैल

2021 का विषय/अभियान: ‘एक न्यायपूर्ण और स्वस्थ विश्व का निर्माण’ (Building a fairer and healthier world)।

महत्वपूर्ण तथ्य: 7 अप्रैल, 1948 को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी, इसी उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है।

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खेल मंत्रालय द्वारा जिमनास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की मान्यता बहाल


खेल मंत्रालय ने 10 साल के बाद जिमनास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (जीएफआई) की मान्यता को फिर से बहाल कर दिया है।

  • मंत्रालय ने 31 दिसंबर, 2021 तक तत्काल प्रभाव से जिमनास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (GFI) को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्यता दे दी है।
  • ज्ञात हो कि वर्ष 2011 में मंत्रालय ने निकाय में उल्लंघन के कारण GFI की मान्यता रद्द कर दी थी।
  • मंत्रालय द्वारा 2019- 2023 के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष पद पर सुधीर मित्तल और कोषाध्यक्ष पद पर पर कौशिक बिदिवाला का चुनाव दर्ज किया गया है।

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आईएसएसएफ विश्वकप निशानेबाजी 2021 नई दिल्ली


भारत नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न आईएसएसएफ विश्व कप निशानेबाजी में 15 स्वर्ण पदकों के साथ शीर्ष पर रहा।

  • यह अब तक का एक ही संस्करण में भारत का सबसे सफल अभियान है। भारत ने 15 स्वर्ण, 9 रजत और 6 कांस्य के साथ कुल 30 पदक हासिल किये।
  • आईएसएसएफ विश्व कप 18 से 29 मार्च, 2021 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

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सीबकथॉर्न


हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस साल राज्य के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में सीबकथॉर्न (Seabuckthorn) के पौधे लगाने का फैसला किया है।

  • यह एक झाड़ी है, जो नारंगी-पीले रंग की खाने योग्य बेरों का उत्पादन करती है।
  • भारत में, यह हिमालय क्षेत्र में वृक्ष रेखा के ऊपर आमतौर पर शुष्क क्षेत्रों जैसे लद्दाख और स्पीति के ठंडे रेगिस्तान में पाया जाता है।
  • हिमाचल, लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में लगभग 15,000 हेक्टेयर भूमि सीबकथॉर्न द्वारा आच्छादित है।
  • लोक चिकित्सा के रूप में, सीबकथॉर्न का व्यापक रूप से पेट, हृदय और त्वचा की समस्याओं के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसके फल और पत्तियां विटामिन, कैरोटीनॉयड और ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर होती हैं।

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संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान


‘संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान’ (UN Institute for Training & Research- UNITAR) ने गैर-संचारी रोगों से होने वाली असामयिक मौतों में कमी लाने की दिशा में भारत द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा की है।

  • UNITAR संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की एक समर्पित प्रशिक्षण शाखा है। UNITAR मुख्य रूप से विकासशील देशों विशेष रूप से अल्प विकसित देशों (LDCs), छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य (SIDS) और सबसे अधिक असुरक्षित समूहों और समुदायों की सहायता के लिए प्रशिक्षण और क्षमता विकास गतिविधियाँ प्रदान करता है।
  • UNITAR की स्थापना 1963 में हुई थी। UNITAR एक परियोजना-आधारित संगठन है और इसे संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट से कोई फंड प्राप्त नहीं होता है। संस्थान पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों और अन्य के स्वैच्छिक योगदान से वित्तपोषित है।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित हैं। UNITAR के वर्तमान कार्यकारी निदेशक भारत के निखिल सेठ हैं।