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सार्थक पहल


शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 8 अप्रैल, 2021 को सार्थक (SARTHAQ) पहल शुरू की, जो देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में मदद करेगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों की समग्र उन्नति'- सार्थक (Students and Teachers holistic Advancement Through Quality education- SARTHAQ) पहल को अमृत महोत्सव समारोह के एक भाग के रूप में शुरू किया गया है।

  • यह बच्चों और युवाओं के लिए वर्तमान और भविष्य की विविध राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
  • यह उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारत की परंपरा, संस्कृति और मूल्य प्रणाली के साथ-साथ 21वीं सदी के कौशल को समझने में सहायता करेगी।
  • SARTHAQ के कार्यान्वयन से 25 करोड़ छात्रों, 15 लाख विद्यालयों, 94 लाख शिक्षकों सहित सभी हितधारकों को लाभ होगा।

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ऑक्सीजन संवर्धन इकाई


अप्रैल 2021 में सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMERI) ने एक ऑक्सीजन संवर्धन इकाई (Oxygen Enrichment Unit- OEU) विकसित की है, जो कोविड-19 रोगियों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य: ऑक्सीजन संवर्धन इकाई एक उपकरण है, जो हमारे आस-पास की हवा से ऑक्सीजन को इकट्ठा करता है और ऑक्सीजन-समृद्ध हवा की आपूर्ति के लिए उसमें से नाइट्रोजन को हटाता है।

  • एकत्र की गई ऑक्सीजन को ऑक्सीजन मास्क या नाक में लगाए जाने वाले केनूला के जरिये उन रोगियों को दी जाती है, जिन्हें श्वास संबंधी बीमारियां हैं।
  • इस उपकरण को सुदूरवर्ती स्थानों, घरों या अस्पताल में ऐसे रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जो क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), क्रोनिक हाइपॉक्सेमिया (chronic hypoxemia) और पल्मोनरी एडिमा (pulmonary edema) से पीड़ित हैं।
  • स्वदेश में विकसित यह ऑक्सीजन संवर्धन इकाई ‘प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन’ (Pressure Swing Adsorption) और जियोलाइट कॉलम (Zeolite Columns) के सिद्धांत पर काम करती है, ताकि कुछ दबाव के तहत हवा से नाइट्रोजन को चुनिंदा रूप से हटाया जा सके, जिससे ऑक्सीजन जमा होने में वृद्धि होती है।

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लोग धर्म चुनने के लिए स्वतंत्र: सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल, 2021 को जबरन धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि 18 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति अपना धर्म चुनने के लिए स्वतंत्र है।

महत्वपूर्ण तथ्य: याचिका में कहा गया गया था कि अदालत को केंद्र और राज्यों को काले जादू, अंधविश्वास और धमकी या रिश्वत के माध्यम से जबरन धर्मांतरण को नियंत्रित करने का निर्देश देना चाहिए।

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को धर्म के प्रति आस्था, अभ्यास और प्रचार के लिए संविधान के तहत अधिकार है।
  • संविधान का अनुच्छेद- 25 मौलिक रूप से सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाले बिना धर्म को अपनाने, अभ्यास और प्रचार करने का अधिकार देता है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और जीवन साथी को चुनने का अधिकार है। अदालत किसी व्यक्ति के धर्म या जीवन साथी की पसंद के फैसले को गलत नहीं ठहरा सकती है।

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निर्धारित प्रक्रिया के बिना प्रत्यर्पित नहीं किए जाएंगे रोहिंग्या


अप्रैल 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना म्यांमार प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस दलील को स्वीकार किया है कि भारत में रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं और इन्हें विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 के तहत सभी प्रक्रियाओं के अनुसार निर्वासित किया जाना चाहिए।

  • ‘शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1951 के संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ और उसके बाद ‘शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1967 के प्रोटोकॉल’ के तहत, शरणार्थी शब्द किसी ऐसे व्यक्ति से संबंधित है, जो अपने मूल देश से बाहर है और जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, एक विशेष सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनीतिक विचारधारा के कारणों से उत्पीड़ित होने के डर के कारण वापस लौटने में असमर्थ या अनिच्छुक है।
  • किसी भी देश के नागरिक न होने वाले व्यक्ति (Stateless persons) भी इस अर्थ में शरणार्थी हो सकते हैं, जहां मूल देश (नागरिकता) को उसके 'पूर्व निवास स्थान के देश' के रूप में समझा जाता है।
  • भारत ने अतीत में शरणार्थियों का स्वागत किया है, और वर्तमान में यहाँ लगभग 300,000 लोगों को शरणार्थियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • लेकिन भारत ‘शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1951 के संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ और ‘शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित 1967 के प्रोटोकॉल’’ का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। न ही भारत के पास कोई शरणार्थी नीति है और न ही भारत का कोई शरणार्थी से संबंधित कानून है।

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सेशेल्स में भारतीय परियोजनाओं का उद्घाटन


8 अप्रैल, 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन के साथ एक उच्चस्तरीय आभासी कार्यक्रम में सेशेल्स में भारतीय परियोजनाओं की एक श्रृंखला का उद्घाटन किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में स्थित मजिस्ट्रेट न्यायालय के नए भवन का संयुक्त ई-उद्घाटन किया गया।

  • सेशेल्स तटरक्षक बल को सौंपी गई एक तीव्र गश्ती नौका (fast-patrol vessel) का उद्घाटन किया गया, इस नौका को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियरिंग, कोलकाता द्वारा भारत में निर्मित किया गया है।
  • सेशेल्स के रोमेनविले द्वीप में स्थित 1मेगावाट की क्षमता वाले जमीन पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्र तथा10उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया।
  • प्रधानमंत्री की ’सागर’–‘सिक्यूरिटी एंड ग्रोथ फॉर आल इन द रीजन’ की अवधारणा में सेशेल्स का एक केन्द्रीय स्थान है।
  • सेशेल्स के राष्ट्रपति रामकलावन भारतीय मूल के हैं। बिहार के गोपालगंज जिले में 'परसौनी' उनका पैतृक गांव हैं। अक्टूबर 2020 में सेशेल्स में हुए चुनावों में शानदार जीत के बाद राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन सत्ता में आए।

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दुर्लभ चौकोर छवि के क्वासर की खोज


अप्रैल 2021 में अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों के एक समूह ने 12 दुर्लभ क्वासर्स की खोज की है, जिनमें से प्रत्येक चार अलग-अलग चौकोर छवियां प्रदान करते हैं, जिन्हें आमतौर पर 'आइंस्टीन का क्रॉस' (Einstein’s cross) कहा जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: क्वासर दूर आकाशगंगा का अत्यधिक चमकीला पिंड है, जिसे सुपरमैसिव ब्लैकहोल से ऊर्जा मिलती है।

  • क्वासर अवलोकन का उपयोग मुख्य रूप से आकाशगंगाओं के विकास का निर्धारण करने और हमारे ब्रह्मांड के विस्तार की दर को समझने के लिए डार्क मैटर अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
  • यह अध्ययन खगोल विज्ञानियों के समूह गाइया ग्रैविटेशनल लेंसेज वर्किंग ग्रुप (Gaia Gravitational Lenses Working Group) द्वारा किया गया है। इसमें आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस), नैनीताल के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।
  • चौकोर छवि के क्वासर दुर्लभ हैं और पहली चौकोर छवि वाले क्वासर 1985 में खोजे गए। पिछले चार दशकों में खगोल विज्ञानियों को चौकोर छवि के 50 क्वासर मिले हैं।
  • इस दुर्लभ खोज से ज्ञात क्वासर की संख्या लगभग 25% बढ़ी है और इससे ब्रह्मांड की विस्तार दर निर्धारित करने तथा अन्य रहस्यों के समाधान में मदद मिलेगी।

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अरुणाचल प्रदेश में एक नई पक्षी प्रजाति की खोज


बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश में एक नई पक्षी प्रजाति की खोज की है।

महत्वपूर्ण तथ्य: इस पक्षी की पहचान 'थ्री बैंडेड रोजफिंच' (three-banded rosefinch) के रूप में की गई है। यह भारत में पक्षी परिवार की 1,340वीं प्रजाति बन गया है।

  • 'थ्री बैंडेड रोजफिंच' दक्षिणी चीन का निवासी है और भूटान में भी पाया जाता है।
  • समुद्र स्तर से 3,852 मीटर की ऊंचाई पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग और पश्चिम कामेंग जिलों के बीच सीमा पर पर्वतीय दर्रे सेला में एक नर और एक मादा 'थ्री बैंडेड रोजफिंच' देखे गए।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार 'थ्री बैंडेड रोजफिंच' चीन से भूटान की ओर पलायन करते समय अरुणाचल प्रदेश के उच्च ऊंचाई वाले समशीतोष्ण शंकुधारी वन का उपयोग मार्ग के रूप में करते हैं।
  • 'थ्री बैंडेड रोजफिंच' फ्रिंजिलिडे (Fringillidae) प्रजाति से संबंधित है, जो एक विशिष्ट शंक्वाकार चोंच वाला पक्षी है।
  • 2016 के बाद से,भारत में पक्षियों की सूची में 104 नई प्रजातियों की वृद्धि हुई है।

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बहुपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास ला पेरॉस


भारतीय नौसेना के जहाज ‘आईएनएस सतपुड़ा’ तथा ‘पी 8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट’ (P8I Long Range Maritime Patrol Aircraft) के साथ आईएनएस किल्तान ने पहली बार ‘बहुपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास ला पेरॉस’ (Multinational Naval Exercise La Perouse) में हिस्सा लिया, जिसका संचालन 5 से 7 अप्रैल, 2021 तक पूर्वी हिंद महासागर में किया गया।

  • भारतीय नौसेना के जहाज तथा विमान ने फ्रांस की नौसेना (एफएन), रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी, जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स तथा यूनाइटेट स्टेट्स नेवी (यूएसएन) के जहाजों तथा विमान के साथ समुद्र में तीन दिनों के अभ्यास में भाग लिया।
  • ‘ला पेरॉस’ में सतह पर युद्ध, एंटी-एयर वॉरफेयर और वायु रक्षा अभ्यास, हथियार फायरिंग अभ्यास, सामरिक युद्धाभ्यास और जहाजरानी अभ्यास जैसे जटिल और उन्नत नौसैनिक अभ्यास संचालित किए गए।
  • फ्रांस की नौसेना के नेतृत्व में ला पेरॉस अभ्यास किया गया। 2019 में फ्रांस द्वारा शुरू किए गए ला पेरॉस संयुक्त अभ्यास के पहले संस्करण में ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के जहाजों ने हिस्सा लिया था।

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मानव अंतरिक्ष उड़ान का अंतरराष्ट्रीय दिवस


12 अप्रैल

महत्वपूर्ण तथ्य: 12 अप्रैल, 1961 को पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान भरी गई थी, जिसे सोवियत संघ नागरिक यूरी गगारिन ने अंजाम दिया था।