ग्रेट-निकोबार मेगा अवसंरचना परियोजना

  • 20 Feb 2026

16 फरवरी, 2026 को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) की 6-सदस्यीय विशेष पीठ ने 81,000 करोड़ रुपये की लागत वाली ग्रेट निकोबार मेगा अवसंरचना परियोजना को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उसे वैध ठहराया।

  • न्यायाधिकरण ने माना कि स्वीकृति में पर्याप्त पर्यावरणीय संरक्षण उपाय निहित हैं तथा परियोजना के सामरिक महत्त्व को समुचित रूप से परिलक्षित किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • सामरिक महत्त्व की मान्यता: पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए न्यायाधिकरण ने परियोजना की राष्ट्रीय एवं सामरिक प्रासंगिकता को स्वीकार किया।
  • परियोजना का दायरा: यह मेगा परियोजना लगभग 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है, जिसके अंतर्गत लगभग 130 वर्ग किलोमीटर वन भूमि के विचलन (diversion) का प्रावधान है।
    • इसमें लगभग 10 लाख वृक्षों की कटाई सम्मिलित है, ताकि एक ट्रांस-शिपमेंट बंदरगाह, एकीकृत टाउनशिप, हवाई अड्डा तथा विद्युत संयंत्र की स्थापना की जा सके।
  • द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र (ICRZ) अनुपालन: न्यायाधिकरण ने उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर आधारित निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना का कोई भी भाग प्रतिबंधित द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र (Island Coastal Regulation Zone-ICRZ) में नहीं आता।
  • पर्याप्त पर्यावरणीय संरक्षण उपाय: पर्यावरणीय स्वीकृति में विशिष्ट शर्तों के माध्यम से लेदरबैक समुद्री कछुआ (Leatherback Sea Turtle), निकोबार मेगापोड, खारे पानी का मगरमच्छ, रॉबर क्रैब तथा निकोबारी मकाक जैसे संवेदनशील एवं स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण के उपाय निर्धारित किए गए हैं।