ट्रांस-नेप्च्यूनियन पिंड के चारों ओर वायुमंडल की खोज

  • 06 May 2026

4 मई, 2026 को 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट (612533) 2002 XV93 के चारों ओर एक पतले वायुमंडल (atmosphere) की खोज की जानकारी दी गई है। बाहरी सौर मंडल में यह एक अत्यंत दुर्लभ खोज है।

मुख्य बिंदु

  • दुर्लभ वायुमंडलीय खोज: बर्फ से ढका यह ट्रांस-नेप्ट्यूनियन ऑब्जेक्ट (612533) 2002 XV93 नेप्च्यून (वरुण) ग्रह के पार सुदूर कुइपर बेल्ट (Kuiper Belt) में स्थित है।
  • केवल दूसरा ज्ञात मामला: इससे पहले, प्लूटो ही एकमात्र ऐसा ज्ञात ट्रांस-नेप्ट्यूनियन ऑब्जेक्ट था जिसके पास अपना वायुमंडल था।
  • ऑब्जेक्ट का आकार: इस ऑब्जेक्ट का व्यास (diameter) लगभग 500 किमी है, जो इसे बौने ग्रहों प्लूटो और एरिस (Eris) की तुलना में काफी छोटा बनाता है।
  • अत्यंत पतला वायुमंडल: अनुमान है कि इसका वायुमंडल पृथ्वी के वायुमंडल से 50 से 100 लाख (5-10 मिलियन) गुना और प्लूटो के वायुमंडल से 50 से 100 गुना अधिक पतला है।
  • संभावित संरचना: शोधकर्ताओं का मानना है कि इस वायुमंडल में मीथेन, नाइट्रोजन या कार्बन मोनोऑक्साइड गैसें शामिल हो सकती हैं।
  • संभावित कारण - क्रायोवोलकैनिज़्म (Cryovolcanism): इसका एक कारण वहां चल रही क्रायोवोलकैनिक्स (बर्फ़ीले ज्वालामुखी) गतिविधि हो सकती है, जहां सतह की दरारों से वाष्पशील गैसें और बर्फ़ीले पदार्थ बाहर निकलते हैं।
  • वैकल्पिक कारण - टक्कर की घटना (Impact Event): वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि यह वायुमंडल अस्थायी (temporary) हो सकता है, जो किसी अन्य खगोलीय पिंड के साथ हुई टक्कर के बाद अंदर दबी गैसों के बाहर निकलने से बना हो।
  • अवलोकन तकनीक: यह खोज जापान में ज़मीनी टेलीस्कोपों की मदद से 'स्टेलर ऑकल्टेशन' (stellar occultation - जब कोई खगोलीय पिंड किसी तारे के सामने से गुज़रता है) के अवलोकन के ज़रिए की गई, जहां इस ऑब्जेक्ट ने कुछ समय के लिए एक सुदूर तारे की रोशनी को रोका था।
  • कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट: यह ऑब्जेक्ट कुइपर बेल्ट में स्थित है, जो शुरुआती सौर मंडल के बचे हुए बर्फीले अवशेषों से भरा एक सुदूर क्षेत्र है।
  • प्राचीन खगोलीय पिंड: शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह सौर मंडल के जन्म के दौरान 4.5 अरब (4.5 billion) साल से भी पहले बना था।
  • कक्षा का विवरण (Orbital Details): इस ऑब्जेक्ट को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 247 वर्ष लगते हैं और वर्तमान में यह पृथ्वी से लगभग 5.5 अरब किमी दूर स्थित है।