SC ने जमानत याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण हेतु उपाय सुझाए

  • 12 May 2026

11 मई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों में लंबित जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटारे के लिए कई उपाय सुझाए तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण के महत्त्व पर बल दिया।

मुख्य बिंदु

  • जमानत याचिकाओं की स्वचालित सूचीबद्धता: न्यायालय ने नियमित एवं अग्रिम जमानत याचिकाओं की स्वचालित तथा आवधिक सूचीबद्धता की सिफारिश की, ताकि सुनवाई में होने वाली देरी कम हो सके।
  • निपटारे की समय सीमा: पीठ ने उच्च न्यायालयों में जमानत याचिकाओं के निपटारे हेतु एक निश्चित बाह्य समय-सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया।
  • सॉफ्टवेयर आधारित सूची प्रणाली: न्यायालय ने तकनीक-संचालित प्रणाली के माध्यम से जमानत मामलों को साप्ताहिक अथवा पाक्षिक आधार पर सूचीबद्ध करने का सुझाव दिया।
  • कार्यसूची में प्राथमिकता: समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए जमानत याचिकाओं को न्यायालय की कार्यसूची (Cause List) में प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई।
  • लंबित मामलों पर चिंता: सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय में जमानत मामलों की अधिक लंबित संख्या पर चिंता व्यक्त की।
  • अनावश्यक स्थगन से परहेज: न्यायालय ने कहा कि सरकारी वकीलों द्वारा अनावश्यक स्थगन (Adjournment) से बचा जाना चाहिए।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण: पीठ ने दोहराया कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना न्यायालयों का संवैधानिक दायित्व है।
  • NDPS मामलों पर विशेष ध्यान: न्यायालय ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेस (NDPS) से जुड़े मामलों में समय पर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • पीड़ितों की भागीदारी: जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पीड़ितों की न्यायिक कार्यवाही में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें विधिक प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जाए।