EU का बड़ा निर्णय: भारतीय समुद्री उत्पादों को निर्यात अनुमति
- 15 May 2026
12 मई, 2026 को यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी संशोधित प्रारूप सूची (Revised Draft List) में भारत को शामिल किया, जिससे सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय जलीय कृषि (Aquaculture) उत्पादों का यूरोपीय बाजारों में निर्यात जारी रह सकेगा।
मुख्य बिंदु
- यूरोपीय संघ ने भारत को उन देशों की संशोधित सूची में शामिल किया है, जिन्हें सितंबर 2026 के बाद भी जलीय कृषि उत्पादों के निर्यात की अनुमति होगी।
- इस निर्णय से यूरोपीय बाजार पर निर्भर भारत के समुद्री उत्पाद एवं जलीय कृषि निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है।
- उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में जारी यूरोपीय संघ के पूर्व “इम्प्लीमेंटिंग रेगुलेशन” में भारत को सूची से बाहर कर दिया गया था।
- इसके बाद भारत ने यूरोपीय संघ के एंटीमाइक्रोबियल एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप कई नियामकीय एवं अनुपालन संबंधी कदम उठाए।
- यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार निर्यातित पशु-आधारित उत्पादों में प्रतिबंधित एंटीमाइक्रोबियल पदार्थों तथा वृद्धि-वर्धक दवाओं (Growth-promoting Medicines) की उपस्थिति नहीं होनी चाहिए।
- संशोधित विनियमन को औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद अब सितंबर 2026 के पश्चात भी भारतीय समुद्री उत्पादों का निर्बाध निर्यात संभव हो सकेगा।
- वर्ष 2025-26 के दौरान यूरोपीय संघ भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का तीसरा सबसे बड़ा गंतव्य रहा।
- भारत ने 2025-26 में यूरोपीय संघ को लगभग 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया।
- पिछले वर्ष की तुलना में यूरोपीय संघ को समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में 41.45% तथा मात्रा में 38.29% की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत से यूरोप को निर्यात किए जाने वाले समुद्री उत्पादों में संवर्धित झींगा (Farmed Shrimp) प्रमुख उत्पाद बना रहा।
- भारत ने राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP), फसलोत्तर परीक्षण, ट्रेसबिलिटी तथा एंटीबायोटिक निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया है।
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) तथा निर्यात निरीक्षण परिषद (Export Inspection Council) ने अनुपालन तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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