वैश्विक रेत संकट पर UNEP की चेतावनी
- 16 May 2026
12 मई, 2026 को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने “सैंड एंड सस्टेनेबिलिटी: एन एसेंशियल रिसोर्स फॉर नेचर एंड डेवलपमेंट” शीर्षक रिपोर्ट जारी की, जिसमें चेतावनी दी गई कि शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि एवं अवसंरचनात्मक विस्तार के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती रेत की मांग गंभीर पर्यावरणीय क्षति उत्पन्न कर रही है।
मुख्य बिंदु
- मांग में तीव्र वृद्धि: वैश्विक रेत मांग 1970 में 9.6 अरब टन से बढ़कर 2020 में लगभग 50 अरब टन तक पहुंच गई।
- मुख्य कारण: शहरीकरण, अवसंरचना विकास, शहरों की ओर बढ़ता प्रवास तथा प्रति व्यक्ति निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) में वृद्धि रेत की मांग को बढ़ा रही है।
- आर्थिक महत्त्व: वर्ष 2024 में वैश्विक रेत बाजार का मूल्य लगभग 569.4 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया, जो निर्माण, पर्यटन, मत्स्यन एवं खनन क्षेत्रों को समर्थन प्रदान करता है।
- पर्यावरणीय क्षति: अत्यधिक रेत खनन से तटीय एवं नदीय अपरदन, आवास विनाश, भूजल क्षरण तथा बाढ़ जोखिम में वृद्धि जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
- स्वास्थ्य प्रभाव: सिलिका धूल के संपर्क में आने से श्रमिकों में श्वसन संबंधी रोग एवं सिलिकोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
- सुझाए गए उपाय: UNEP ने पुनर्चक्रण, सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था तथा जैव विविधता-केंद्रित नियोजन सहित 24 उपायों का प्रस्ताव किया।
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