सुप्रीम कोर्ट: अगस्त्यमलाई में अतिक्रमण हटाने का निर्देश
- 03 Jun 2026
29 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील ‘अगस्त्यमलाई परिदृश्य’ में किए गए अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों को तत्काल हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि वनों, वन्यजीवों और नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना एक संवैधानिक दायित्व है।
मुख्य बिंदु
- अतिक्रमण हटाने की कार्ययोजना: संबंधित राज्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अतिक्रमण हटाने की विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसमें स्पष्ट समय-निर्धारण, जिम्मेदारियां, पुनर्वास उपाय तथा पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (Ecological Restoration) के प्रावधान शामिल होंगे।
- अवैध संरचनाओं पर कार्रवाई: वन क्षेत्रों में संचालित सभी अवैध रिसॉर्ट, पर्यटन सुविधाएं, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान तथा अनधिकृत अवसंरचनाओं को बंद कर उन्हें ध्वस्त किया जाएगा।
- सरकारी बुनियादी ढांचा: वन क्षेत्रों के भीतर बने अनधिकृत सरकारी कार्यालयों, सुविधाओं और ढांचों को 6 महीने के भीतर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित या हटाया जाना अनिवार्य होगा।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने उन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक, दंडात्मक और आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है, जिन्होंने संरक्षित वनों में इन अवैध निर्माणों को मंजूरी दी या उन्हें बढ़ावा दिया।
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