सामयिक - 09 April 2026
खरीफ 2026 के लिए 'पोषक तत्व आधारित सब्सिडी' (NBS) दरें
8 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आगामी खरीफ 2026 सीज़न के लिए फॉस्फेटिक और पोटासिक (P&K) उर्वरकों हेतु ‘पोषक तत्व आधारित सब्सिडी’ (NBS) दरों को अपनी मंजूरी दे दी।
मुख्य बिंदु
- सब्सिडी अवधि: यह 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक लागू रहेगी।
- बजटीय आवंटन: इसके लिए ₹41,533 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो खरीफ 2025 के ₹37,216.15 करोड़ के आवंटन से अधिक है।
- उद्देश्य: किसानों को किफायती दामों पर उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और सब्सिडी को वैश्विक मूल्य प्रवृत्तियों के साथ संरेखित (Align) करना।
- NBS योजना: इसके तहत P&K उर्वरकों (जिसमें DAP और NPKS उर्वरक शामिल हैं) पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी सीधे उर्वरक कंपनियों को सरकार द्वारा स्वीकृत दरों के आधार पर दी जाती है।
- कवरेज: यह योजना P&K उर्वरकों के 28 ग्रेडों पर लागू होती है, जिन्हें निर्माताओं और आयातकों के माध्यम से वितरित किया जाता है।
- विचार किए गए प्रमुख इनपुट: यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) और सल्फर।
- पृष्ठभूमि: भारत में NBS योजना 1 अप्रैल, 2010 से सफलतापूर्वक संचालित है।
- महत्व: यह योजना खरीफ फसल के महत्वपूर्ण मौसम के दौरान किसानों को मजबूत समर्थन देती है; उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करती है; और सरकार के राजकोषीय प्रबंधन के साथ किसान कल्याण का एक बेहतरीन संतुलन बनाती है।
सामयिक खबरें पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण
NHAI की 'आरोग्य वन' पहल
अप्रैल 2026 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षों के वृक्षारोपण के लिए ‘आरोग्य वन’ (Arogya Van) पहल की घोषणा की।
मुख्य बिंदु
- पहल के बारे में: ‘आरोग्य वन’ विशेष रूप से औषधीय वृक्षों के रोपण पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य जैव विविधता और पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देना है।
- प्रथम चरण का विवरण: इस चरण में कई राज्यों में फैले 17 भूखंड शामिल हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 62.8 हेक्टेयर है। यहाँ लगभग 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे।
- शामिल राज्य: मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-NCR, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़।
- पहचानी गई वृक्ष प्रजातियां: इसमें लगभग 36 औषधीय प्रजातियां शामिल हैं, जैसे - नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर और मौलश्री।
- पारिस्थितिक लाभ: यह वृक्षारोपण परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्म जीवों को आश्रय व भोजन प्रदान करेगा, जिससे पारिस्थितिक तंत्र का लचीलापन और सड़क किनारे का पर्यावरण बेहतर होगा।
- वृक्षारोपण की रणनीति: टोल प्लाजा, इंटरचेंज और राजमार्गों के पास के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पूरी तरह से कृषि-जलवायु अनुकूलता पर आधारित है और सरकार के ‘भू-निर्माण दिशानिर्देशों’ के अनुरूप है।
- भविष्य का विस्तार: आगे के वृक्षारोपण के लिए 188 हेक्टेयर खाली भूमि की पहचान की गई है। वृक्षों के जीवित रहने की दर बेहतर करने के लिए यह कार्य मानसून के दौरान करने की योजना है।
- सांस्कृतिक और शैक्षिक मूल्य: यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देती है; औषधीय वृक्षों के एक ‘जीवित भंडार’ के रूप में कार्य करती है; और स्वदेशी ज्ञान के बारे में जन जागरूकता बढ़ाती है।
महिलाओं की ऋण भागीदारी पर नीति आयोग की रिपोर्ट
7 अप्रैल, 2026 को नीति आयोग ने “ऋण प्राप्त करने वाली महिलाओं से लेकर निर्माता तक: महिलाएं और भारत का विकसित होता ऋण बाजार” (From Borrowers to Builders: Women and India’s Evolving Credit Market) नामक शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट का द्वितीय संस्करण जारी किया, जिसमें औपचारिक ऋण प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है।
मुख्य बिंदु
- ऋण भागीदारी में वृद्धि: महिलाओं का क्रेडिट पोर्टफोलियो ₹76 लाख करोड़ (कुल क्रेडिट का 26%) तक पहुँच गया है, जो 2017 के ₹16 लाख करोड़ से लगभग 4.8 गुना अधिक है।
- उधारकर्ताओं की वृद्धि के रुझान: ‘क्रेडिट-सक्रिय’ (Credit-active) महिला उधारकर्ताओं की संख्या में 9% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की दर से वृद्धि हुई है। ऋण की पहुँच 19% से बढ़कर 36% हो गई है। फिर भी, लगभग 45 करोड़ महिलाएँ अभी भी ऋण-पात्र बनी हुई हैं।
- वित्तीय व्यवहार में बदलाव: महिलाओं का रुझान बुनियादी ऋण से आगे बढ़कर अब खुदरा (Retail) और व्यावसायिक ऋण की ओर हो रहा है, जो उनकी बेहतर वित्तीय क्षमता और आर्थिक एकीकरण को दर्शाता है।
- व्यावसायिक ऋण में वृद्धि: महिलाओं को दिए जाने वाले वाणिज्यिक ऋण में 31% CAGR (2022–2025) की दर से वृद्धि हुई, जो 17% की समग्र वाणिज्यिक ऋण वृद्धि से कहीं अधिक है। 19% माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ता खुदरा/वाणिज्यिक ऋण की ओर चले गए हैं।
- भौगोलिक विस्तार: दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी ऋण वृद्धि देखी गई है।
- ऋण उत्पादों के रुझान: व्यक्तिगत और स्वर्ण ऋण (Gold Loans) सबसे आम हैं। आवास ऋण बढ़ रहे हैं, जो महिलाओं के बीच बढ़ती संपत्ति के स्वामित्व को दर्शाता है।
- डिजिटलीकरण की भूमिका: मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर औपचारिक ऋण तक पहुँच में सुधार कर रहा है, जिससे अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हो रही है।
- अध्ययन का महत्व: यह रिपोर्ट लगभग 16 करोड़ महिलाओं के डेटा पर आधारित है, जो इसे महिलाओं की ऋण पहुँच के सबसे व्यापक आकलनों में से एक बनाता है। यह ‘महिला उद्यमिता मंच’ (WEP) की ‘फाइनेंसिंग विमेन कोलैबोरेटिव’ (FWC) पहल का मजबूती से समर्थन करता है।
कलाई-II जलविद्युत परियोजना को मंजूरी
8 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में ‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति’ (CCEA) ने अरुणाचल प्रदेश में लोहित नदी पर ₹14,105.83 करोड़ की ‘कलाई-II जलविद्युत परियोजना’ को मंजूरी प्रदान की।
मुख्य बिंदु
- परियोजना का विवरण:
- स्थान: लोहित नदी, अंजॉ जिला, अरुणाचल प्रदेश।
- स्थापित क्षमता: 1,200 MW (जिसमें 190 MW की 6 इकाइयाँ और 60 MW की 1 इकाई शामिल है)।
- विद्युत उत्पादन: अनुमानित वार्षिक उत्पादन: 4,852.95 मिलियन यूनिट। इस परियोजना को पूरा करने की समय-सीमा 78 महीने तय की गई है।
- रणनीतिक महत्व: लोहित बेसिन में यह अपनी तरह की पहली प्रमुख जलविद्युत परियोजना है। यह अरुणाचल प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को मज़बूत करेगी और अत्यधिक मांग (Peak demand) के प्रबंधन तथा ग्रिड संतुलन में मदद करेगी।
- कार्यान्वयन संरचना: यह THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ₹599.88 करोड़ की केंद्रीय सहायता और राज्य की इक्विटी हिस्सेदारी के लिए ₹750 करोड़ की सहायता दी जाएगी।
- अरुणाचल प्रदेश को लाभ: राज्य को इस परियोजना से 12% मुफ्त बिजली मिलेगी, साथ ही ‘स्थानीय क्षेत्र विकास निधि’ के लिए 1% का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: इस परियोजना के तहत लगभग 29 किलोमीटर लंबी सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे नामसाई और अंजॉ जिलों में कनेक्टिविटी में भारी सुधार होगा।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे; उचित मुआवज़ा और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल लागू की जाएंगी, जिससे समग्र क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा।
भारत-तुर्किये विदेश कार्यालय स्तरीय परामर्श बैठक
8 अप्रैल, 2026 को भारत और तुर्किये ने नई दिल्ली में 12वें दौर के विदेश कार्यालय स्तरीय परामर्श (FoC) की बैठक आयोजित की। यह भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयासों का संकेत है।
मुख्य बिंदु
- बैठक का विवरण: 2022 (अंकारा) के बाद यह इस तरह का पहला परामर्श है।
- तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि: कश्मीर पर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की टिप्पणियों को लेकर तनाव शुरू हुआ था। इसके बाद, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के कारण यह तनाव अपने चरम पर पहुँच गया था।
- चर्चा के प्रमुख क्षेत्र: व्यापार और निवेश; पर्यटन और लोगों के बीच आपसी संबंध; प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और शिक्षा; तथा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त सहयोग।
- वैश्विक और क्षेत्रीय संदर्भ: अमेरिका-ईरान संघर्ष पर चल रहे राजनयिक प्रयासों में तुर्किये सक्रिय रूप से शामिल है और उसने हालिया युद्धविराम पहलों में भी अहम योगदान दिया है।
- तनाव का आर्थिक प्रभाव: इस कूटनीतिक तनाव के कारण तुर्किये जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 36% की भारी गिरावट (जून 2025 तक) दर्ज की गई, और द्विपक्षीय व्यापार में भी लगभग 16% की कमी आई।
- भारत का कूटनीतिक बदलाव: तुर्किये और अज़रबैजान के साथ तनाव के बाद नए सिरे से संपर्क बढ़ाना, भारत के एक व्यावहारिक और परिपक्व कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
| हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘आरोग्य वन’ (Arogya Van) पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य राजमार्गों के किनारे किस प्रकार के वृक्षों का रोपण करना है? -- औषधीय वृक्ष |
| हाल ही में अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (SMOPS‑2026) का आयोजन किस शहर में प्रारंभ हुआ? -- बेंगलुरु |
| हाल ही में खरीफ 2026 के लिए स्वीकृत पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) दरें किस प्रकार के उर्वरकों पर लागू होती हैं? -- फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (P&K) उर्वरक |
| हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने कलाई-II जलविद्युत परियोजना को स्वीकृति प्रदान की; यह परियोजना किस नदी पर स्थित होगी? -- लोहित नदी |
| हाल ही में नीति आयोग की रिपोर्ट “ऋण प्राप्त करने वाली महिलाओं से लेकर निर्माता तक: महिलाएं और भारत का विकसित होता ऋण बाजार” के अनुसार, महिलाओं का ऋण पोर्टफोलियो कुल ऋण का लगभग 26% पहुँच गया है। यह राशि कितनी है? -- ₹76 लाख करोड़ |
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