भारत–यूके अपतटीय पवन टास्कफोर्स

  • 19 Feb 2026

18 फरवरी, 2026 को भारत और यूनाइटेड किंगडम ने ‘विजन 2035’ स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के अंतर्गत अपतटीय पवन ऊर्जा विकास को गति देने के उद्देश्य से ‘भारत–यूके अपतटीय पवन टास्कफोर्स’ की स्थापना की।

  • यह पहल दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

प्रमुख बिंदु

  • रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यूके के उपप्रधानमंत्री डेविड लैमी और ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन की उपस्थिति में टास्कफोर्स का शुभारंभ किया। यह द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • विजन 2035 के तहत रूपरेखा: यह पहल ‘विजन 2035’ तथा चौथे भारत–यूके ऊर्जा संवाद के अंतर्गत गठित की गई है, जिसका उद्देश्य भारत में अपतटीय पवन ऊर्जा पारिस्थितिक तंत्र के विकास हेतु रणनीतिक नेतृत्व और समन्वय सुनिश्चित करना है।
  • पूरक क्षमताएँ: अपतटीय पवन परियोजनाओं के विस्तार और सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला विकसित करने में यूके का व्यापक अनुभव है, जबकि भारत के पास विशाल ऊर्जा मांग, दीर्घकालिक विकास संभावनाएँ और तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार है।
  • तीन प्रमुख सहयोग क्षेत्र: सहयोग का केंद्र बिंदु पारिस्थितिक तंत्र की योजना और बाजार संरचना (जैसे समुद्रतल लीज़िंग और राजस्व सुनिश्चितता), अवसंरचना एवं आपूर्ति शृंखला (बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और विशेष जहाज़) तथा वित्तीय तंत्र (ब्लेंडेड फाइनेंस और संस्थागत पूंजी) होंगे।
  • वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना: प्रारंभिक चरण की अपतटीय पवन परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार ने ₹7,453 करोड़ के प्रावधान के साथ वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना लागू की है, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुदृढ़ होगी।
  • चिन्हित अपतटीय क्षेत्र: गुजरात और तमिलनाडु के तटों के समीप संभावनाशील अपतटीय पवन क्षेत्रों की पहचान की गई है। प्रारंभिक परियोजना विकास के लिए राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान द्वारा सर्वेक्षण भी संपन्न किए गए हैं।
  • नवीकरणीय क्षमता में वृद्धि: भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता 272 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसमें 141 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा और 55 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।