2031-2035 के लिए भारत के अद्यतन NDC लक्ष्य स्वीकृत
- 26 Mar 2026
25 मार्च, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) एवं पेरिस समझौते के अंतर्गत 2031-2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य बिंदु
- उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य: भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी का लक्ष्य रखा है।
- स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य: 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य।
- कार्बन सिंक सृजन: वन एवं वृक्ष आच्छादन के माध्यम से 3.5-4 अरब टन CO₂समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने की योजना।
- अब तक की प्रगति:
- 2005-2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी।
- 2026 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 52% से अधिक।
- 2021 तक 2.29 अरब टन CO₂ समतुल्य कार्बन सिंक सृजित।
- NDC को समर्थन देने वाली प्रमुख पहलें:
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं
- पीएम-कुसुम योजना
- परमाणु ऊर्जा एवं कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों का विस्तार
- वैश्विक सहयोग मंच:
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन
- आपदा सहनशील अवसंरचना गठबंधन
- वैश्विक जैवईंधन गठबंधन
- अनुकूलन (Adaptation) उपाय:
- तटीय संरक्षण हेतु मैंग्रोव पुनर्स्थापन।
- हिमालयी क्षेत्रों में हिमनद (ग्लेशियर) निगरानी।
- हीट एक्शन प्लान एवं प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।
- नीतिगत ढांचा: राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना एवं राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं के माध्यम से क्रियान्वयन, जिन्हें जल जीवन मिशन एवं पीएम कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं का समर्थन प्राप्त है।
- जन-केंद्रित दृष्टिकोण: ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE)’ तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलें जलवायु कार्रवाई में जनभागीदारी को बढ़ावा देती हैं।
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