28,840 करोड़ रुपए की संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी

  • 26 Mar 2026

25 मार्च, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से संबंधित ‘संशोधित उड़ान योजना’ को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू करने हेतु ₹28,840 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की।

मुख्य बिंदु

  • उद्देश्य: क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना, हवाई यात्रा को किफायती बनाना तथा टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना।
  • हवाई अड्डों का विस्तार:
    • अप्रयुक्त हवाई पट्टियों से 100 नए हवाई अड्डों का विकास।
    • पूंजीगत परिव्यय: ₹12,159 करोड़।
  • धारणीयता समर्थन (Sustainability Support):
    • 3 वर्षों तक परिचालन एवं रखरखाव सहायता।
    • हवाई अड्डों के लिए ₹3.06 करोड़/वर्ष एवं हेलिपोर्ट/वाटर एयरोड्रोम के लिए ₹0.90 करोड़/वर्ष।
    • लगभग 441 सुविधाओं हेतु कुल लागत: ₹2,577 करोड़।
  • हेलिपैड विकास:
    • 200 आधुनिक हेलिपैड का निर्माण।
    • दूरस्थ, पर्वतीय, द्वीपीय एवं आकांक्षी क्षेत्रों पर विशेष फोकस।
    • परिव्यय: ₹3,661 करोड़।
  • व्यवहार्यता अंतर अनुदान (Viability Gap Funding-VGF):
    • 10 वर्षों में ₹10,043 करोड़ का आवंटन।
    • क्षेत्रीय मार्गों पर एयरलाइन संचालकों को समर्थन।
  • आत्मनिर्भरता को बढ़ावा:
    • पवन हंस के लिए HAL ध्रुव हेलीकॉप्टरों की खरीद।
    • एलायंस एयर के लिए HAL डोर्नियर 228 विमानों की खरीद।
  • UDAN की उपलब्धियां (2016 से):
    • 663 मार्गों का संचालन।
    • 95 हवाई अड्डों/हेलिपोर्ट/वाटर एयरोड्रोम का संयोजन।
    • 3.41 लाख उड़ानों का संचालन।
    • 162.47 लाख यात्रियों को सेवा।
  • व्यापक प्रभाव:
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार।
    • पर्यटन, व्यापार एवं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहन।
    • आत्मनिर्भर भारतके तहत घरेलू एयरोस्पेस पारिस्थितिक तंत्र को सुदृढ़ करना।