सामयिक - 15 May 2026
एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत स्वर्ण आयात पर सीमा निर्धारित
14 मई, 2026 को कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में भारी वृद्धि के बाद केंद्र सरकार ने अग्रिम प्राधिकरण योजना [Advance Authorisation (AA) Scheme] के तहत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा निर्धारित कर दी।
मुख्य बिंदु
- अग्रिम प्राधिकरण (AA) योजना: यह निर्यात उत्पादों में उपयोग किए जाने वाले इनपुट्स के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देती है।
- इसका व्यापक उपयोग विशेष रूप से आभूषण निर्यातकों द्वारा किया जाता है।
- विनियामक सख्ती: पहली बार आवेदन करने वाले आवेदकों के लिए भौतिक निरीक्षण अनिवार्य किया गया है।
- विनिर्माण इकाई, उत्पादन क्षमता तथा परिचालन गतिविधियों का सत्यापन आवश्यक होगा।
- निर्यात दायित्व की शर्त: नई ऑथराइजेशन तभी प्रदान की जाएगी, जब पूर्व ऑथराइजेशन के अंतर्गत कम-से-कम 50% निर्यात दायित्व पूरा कर लिया गया हो।
- निगरानी के उपाय: पाक्षिक (Fortnightly) प्रदर्शन रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।
- रिपोर्ट एक स्वतंत्र चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
- क्षेत्रीय अधिकारियों को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
- निर्णय का कारण: शुल्क मुक्त आयात योजना के दुरुपयोग को रोकना।
- मूल्य अंतर (price arbitrage) के अवसरों का फायदा उठाने वाले बड़े पैमाने के आयात से बचना।
- आयात शुल्क में वृद्धि: सोने और चांदी का आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया।
- प्लैटिनम का शुल्क 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया गया।
- अतिरिक्त कर संरचना: स्वर्ण पर मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) को दोगुना कर 10% किया गया।
- कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC) को बढ़ाकर 5% कर दिया गया।
- 3% एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) सहित कुल प्रभावी शुल्क 18.45% तक पहुंच गया है।
- आर्थिक संदर्भ: वित्त वर्ष 2025-26 में सोने और चांदी का आयात 26.7% बढ़कर 102.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
- भारत के कुल आयात में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी लगभग 14% रही।
- चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है।
- पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा बहिर्वाह को नियंत्रित करने हेतु ये कदम उठाए गए हैं।
- समग्र महत्व: यह कदम गैर-आवश्यक आयातों को नियंत्रित करने तथा विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- इससे निर्यात-आधारित शुल्क छूट योजनाओं की निगरानी और अधिक सुदृढ़ होगी।
- बढ़ते आयात बिल के दबाव के बीच सख्त व्यापार प्रबंधन को दर्शाता है।
EU का बड़ा निर्णय: भारतीय समुद्री उत्पादों को निर्यात अनुमति
12 मई, 2026 को यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी संशोधित प्रारूप सूची (Revised Draft List) में भारत को शामिल किया, जिससे सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय जलीय कृषि (Aquaculture) उत्पादों का यूरोपीय बाजारों में निर्यात जारी रह सकेगा।
मुख्य बिंदु
- यूरोपीय संघ ने भारत को उन देशों की संशोधित सूची में शामिल किया है, जिन्हें सितंबर 2026 के बाद भी जलीय कृषि उत्पादों के निर्यात की अनुमति होगी।
- इस निर्णय से यूरोपीय बाजार पर निर्भर भारत के समुद्री उत्पाद एवं जलीय कृषि निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है।
- उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में जारी यूरोपीय संघ के पूर्व “इम्प्लीमेंटिंग रेगुलेशन” में भारत को सूची से बाहर कर दिया गया था।
- इसके बाद भारत ने यूरोपीय संघ के एंटीमाइक्रोबियल एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप कई नियामकीय एवं अनुपालन संबंधी कदम उठाए।
- यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार निर्यातित पशु-आधारित उत्पादों में प्रतिबंधित एंटीमाइक्रोबियल पदार्थों तथा वृद्धि-वर्धक दवाओं (Growth-promoting Medicines) की उपस्थिति नहीं होनी चाहिए।
- संशोधित विनियमन को औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद अब सितंबर 2026 के पश्चात भी भारतीय समुद्री उत्पादों का निर्बाध निर्यात संभव हो सकेगा।
- वर्ष 2025-26 के दौरान यूरोपीय संघ भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का तीसरा सबसे बड़ा गंतव्य रहा।
- भारत ने 2025-26 में यूरोपीय संघ को लगभग 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया।
- पिछले वर्ष की तुलना में यूरोपीय संघ को समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में 41.45% तथा मात्रा में 38.29% की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत से यूरोप को निर्यात किए जाने वाले समुद्री उत्पादों में संवर्धित झींगा (Farmed Shrimp) प्रमुख उत्पाद बना रहा।
- भारत ने राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP), फसलोत्तर परीक्षण, ट्रेसबिलिटी तथा एंटीबायोटिक निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया है।
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) तथा निर्यात निरीक्षण परिषद (Export Inspection Council) ने अनुपालन तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सामयिक खबरें विज्ञान प्रौद्योगिकी
वैज्ञानिकों द्वारा नई क्वांटम परिघटना की खोज
हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई क्वांटम परिघटना (Quantum Phenomenon) की खोज की है, जो यह दर्शाती है कि विपरीत क्वांटम अवस्थाओं में तैयार किए गए कण कभी-कभी समान अवस्थाओं वाले कणों की तुलना में अधिक जानकारी प्रदान कर सकते हैं। यह खोज क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है।
मुख्य बिंदु
- शोधकर्ताओं ने पाया कि एंटीपैरेलल (विपरीत) क्वांटम अवस्थाएं कुछ क्वांटम मापों में समानांतर (parallel) अवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
- अध्ययन में क्यूबिट्स (Qubits) का विश्लेषण किया गया, जो क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रयुक्त क्वांटम सूचना की मूल इकाइयां हैं।
- वैज्ञानिकों ने समान दिशा में स्पिन रखने वाले क्यूबिट युग्मों (Parallel Spins) तथा विपरीत दिशा में स्पिन रखने वाले क्यूबिट युग्मों (Antiparallel Spins) की तुलना की।
- अध्ययन में पाया गया कि एंटीपैरेलल स्पिन अवस्थाएं तीन असंगत स्पिन घटकों (Incompatible Spin Components) के अधिक सटीक पूर्वानुमान में सहायक रहीं।
- यह निष्कर्ष पारंपरिक क्वांटम धारणा को चुनौती देता है, जिसके अनुसार समान क्वांटम अवस्थाएं सदैव अधिक उपयोगी सूचना प्रदान करती हैं।
- यह शोध हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Heisenberg Uncertainty Principle) और बोह्र के पूरकता सिद्धांत (Bohr’s Complementarity Principle) जैसी मौलिक अवधारणाओं पर आधारित है।
- शोधकर्ताओं ने इस खोज को भौतिक विज्ञानी याकिर अहरोनोव द्वारा प्रस्तावित प्रसिद्ध “मीन किंग्स प्रॉब्लम” (Mean King’s Problem) से भी संबंधित बताया।
- यह खोज क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी तथा क्वांटम उपकरण परीक्षण जैसी प्रौद्योगिकियों को अधिक उन्नत बना सकती है।
- यह अध्ययन दर्शाता है कि क्वांटम प्रणालियों में विषमता (Asymmetry) एवं विरोधात्मक संरचना ऐसी क्षमताएं विकसित कर सकती हैं, जो सममित प्रणालियों में संभव नहीं होतीं।
ट्राई ने डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग फ्रेमवर्क में संशोधन किया
13 मई, 2026 को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने “डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए संपत्तियों की रेटिंग (संशोधन) विनियम, 2026” [Rating of Properties for Digital Connectivity (Amendment) Regulations, 2026] जारी किया।
मुख्य बिंदु
- संशोधित विनियमों के तहत अतिरिक्त हाफ-स्टार रेटिंग स्तर पेश किये गए हैं, जिससे पूर्व की 5-स्तरीय रेटिंग संरचना को विस्तारित कर 9-स्तरीय रेटिंग फ्रेमवर्क में परिवर्तित किया गया है।
- ट्राई के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य संपत्तियों के बीच बेहतर अंतर स्पष्ट करना तथा डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना एवं सेवा गुणवत्ता का अधिक सटीक आकलन सुनिश्चित करना है।
- संशोधित फ्रेमवर्क के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासीय एवं वाणिज्यिक संपत्तियों को चरणबद्ध डिजिटल कनेक्टिविटी मूल्यांकन हेतु आवेदन करने की अनुमति दी गई है।
- नई व्यवस्था के तहत डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसियां योजना चरण में “डिजाइन्ड फॉर” प्रमाण-पत्र तथा अवसंरचना तैनाती पूर्ण होने के बाद “इंस्टॉलेशन कम्प्लीटेड फॉर” प्रमाण-पत्र जारी करेंगी।
- संपत्ति में दूरसंचार सेवाएं प्रारंभ होने के बाद अंतिम डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्रदान की जाएगी।
- नियामक ने मौजूदा संपत्तियों के लिए एक वैकल्पिक डिजिटल कनेक्टिविटी ऑडिट तंत्र भी शुरू किया है, जिससे औपचारिक रेटिंग प्रदान किए जाने से पूर्व अवसंरचनात्मक कमियों की पहचान की जा सकेगी।
- संशोधनों के माध्यम से डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसियों के आचार-संहिता प्रावधानों को भी अधिक सुदृढ़ बनाया गया है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके।
- भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) की स्थापना भारत सरकार द्वारा दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 की धारा 3 के अंतर्गत की गई थी।
- यह भारत के दूरसंचार क्षेत्र का प्रमुख नियामक निकाय है।
| हाल ही में सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन (AA) योजना के तहत स्वर्ण आयात पर कितनी मात्रात्मक सीमा निर्धारित की? -- 100 किलोग्राम |
| हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) ने सितंबर 2026 के बाद भी भारत से किन उत्पादों के निरंतर निर्यात की अनुमति प्रदान की? -- जलीय कृषि एवं समुद्री उत्पाद |
| हाल ही में आयुष मंत्रालय ने 22 भारतीय भाषाओं में आयुष ज्ञान प्रणालियों से संबंधित AI-संचालित डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किसके साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए? -- डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) |
| हाल ही में भारतीय थल सेना और भारतीय नौसेना ने किस उद्देश्य से एक संबद्धता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए? -- अंतर-सेवा सहयोग एवं संयुक्तता को सुदृढ़ करने हेतु |
| हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के निदेशक के कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया; वर्तमान में CBI निदेशक कौन हैं? -- प्रवीण सूद |
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