सामयिक - 15 September 2026
भारत-मर्कोसुर के मध्य PTA के विस्तार पर वार्ता
14 सितंबर, 2026 को भारत और मर्कोसुर (MERCOSUR) ने अपने मौजूदा वरीयतापूर्ण व्यापार समझौते (PTA) के विस्तार के लिए वार्ता प्रारंभ की।
मुख्य बिंदु
- वार्ता ढांचा: भारत और मर्कोसुर विस्तारित समझौते के लिए संदर्भ शर्तों (Terms of Reference–ToR) को अंतिम रूप दे रहे हैं।
- विस्तार का उद्देश्य: प्रस्तावित समझौता पारस्परिक आर्थिक हित के अतिरिक्त क्षेत्रों को भी शामिल करेगा।
- आर्थिक लाभ: विस्तार का उद्देश्य बाजार अवसरों को बढ़ाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करना है।
- मौजूदा समझौता: वर्तमान PTA दोनों पक्षों के बीच व्यापारित चयनित उत्पादों को वरीयतापूर्ण पहुंच प्रदान करता है।
- मर्कोसुर सदस्य: इस समूह मेंअर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे और बोलिवियाशामिल हैं।
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विशेष अभियान 6.0: ई-अपशिष्ट के प्रभावी निपटान पर जोर
14 सितंबर, 2026 को भारत सरकार ने विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) के शुभारंभ की घोषणा की, जिसे 2-31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जाएगा। इसमें ई-अपशिष्ट के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख फोकस: अभियान स्वच्छता, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और विशेष रूप से ई-अपशिष्ट के पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार निपटान को बढ़ावा देगा।
- पिछला अभियान: विशेष अभियान 6.0, विशेष अभियान 5.0 की उपलब्धियों पर आधारित है, जिसे कोयला मंत्रालय के निर्देशन में उसके सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और क्षेत्रीय कार्यालयों में लागू किया गया था।
- साफ किया गया क्षेत्र: विशेष अभियान 5.0 के तहत1.13 करोड़ वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र की सफाई की गई।
- स्क्रैप निपटान: 14,017 मीट्रिक टन से अधिकस्क्रैप का निपटान किया गया।
- राजस्व प्राप्ति: स्क्रैप निपटान से लगभग₹56.85 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।
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थैलियम कॉपर सेलेनाइड में तरंग-सदृश ऊष्मा परिवहन
सितंबर 2026 में बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के शोधकर्ताओं ने थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu₅Se₃) में एक असामान्य तरंग-सदृश ऊष्मा परिवहन तंत्र की पहचान की, जो अपशिष्ट ऊष्मा के अधिक दक्ष तापवैद्युत रूपांतरण की संभावनाएँ खोलता है।
मुख्य बिंदु
- अध्ययनित पदार्थ: TlCu₅Se₃ एक जटिल कॉपर चाल्कोजेनाइड है, जिसकी चतुष्कोणीय क्रिस्टल संरचना है और क्रिस्टलोग्राफिक c-अक्ष के साथ खुले चैनल पाए जाते हैं।
- असामान्य ऊष्मा परिवहन: प्रबल एनहार्मोनिसिटी और सीमित कॉपर-आयन गतिशीलता के कारण ऊष्मा विभिन्न कंपन विधाओं के बीच तरंग-सदृश सहसंबद्धता के माध्यम से प्रवाहित होती है।
- अत्यल्प ऊष्मीय चालकता: यह तंत्र संरचनात्मक स्थिरता बनाए रखते हुए पारंपरिक फोनॉन परिवहन को कम करता है।
- तापवैद्युत प्रदर्शन: पदार्थ ने1.7 का तापवैद्युत मेरिट गुणांक (zT) प्राप्त किया, जो शुद्ध त्रिघटकीय चाल्कोजेनाइडों में सर्वाधिक दर्ज मानों में से एक है।
- अपशिष्ट ऊष्मा पुनर्प्राप्ति: ऐसे पदार्थ औद्योगिक अपशिष्ट ऊष्मा को विद्युत में बदलने की दक्षता बढ़ा सकते हैं।
- संभावित उपयोग: विद्युत संयंत्र, इस्पात एवं सीमेंट उद्योग, ऑटोमोबाइल, डेटा सेंटर, बैटरी ताप प्रबंधन और ताप अवरोधक कोटिंग इसके संभावित उपयोग क्षेत्र हैं।
ग्रास माशे तकनीक
हाल ही में, श्रीनगर के एक शिल्पकार ने ग्रास माशे तकनीक का विकास किया की है, जिसके अंतर्गत डल झील से निकाली गई जलीय खरपतवार और घास को सजावटी एवं उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है।
ग्रास माशे तकनीक क्या है?
- यह एक नवीन शिल्प तकनीक है जो हस्तशिल्प के लिए कच्चे माल के रूप में डल झील से निकाली गई जलीय खरपतवार और घास का उपयोग करती है।
- इसके अंतर्गत जैविक कचरे को सजावटी और उपयोगी उत्पादों में बदलने हेतु कश्मीर की पारंपरिक पेपर-माशे (Papier-Mâché) तकनीक को अपनाया जाता है।
यह कैसे काम करती है?
- जलीय खरपतवार को सुखाकर बारीक रेशेदार लुगदी में तैयार किया जाता है।
- इस लुगदी को उपयुक्त सामग्रियों के साथ मिलाकर मनचाहे आकार में ढाला जाता है और सुखाया जाता है।
- तैयार उत्पादों से एक प्राकृतिक, पत्थर जैसी आकार प्राप्त होती है, जो पारंपरिक शिल्प कला को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जोड़ती है।
कश्मीर पेपर-माशे: सांस्कृतिक संदर्भ
- उत्पत्ति: इसे 14वीं शताब्दी में फारस से आए मुस्लिम संत मीर सय्यद अली हमदानी द्वारा कश्मीर में लाया गया था।
- विषय-वस्तु (थीम्स): फूल, बॉक्स पैटर्न और जंगल के स्वरूप ।
- डिजाइन: 'हजारा' (Hazara) और 'गुल-इ-विलायत' (Gul-i-wilayat) प्रमुख पारंपरिक पैटर्न हैं, जिनमें फूल, पत्तियां और पक्षीयों को चित्रित किया जाता हैं।
- जीआई संरक्षण: भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत पंजीकृत और संरक्षित ।
| भारत और मर्कोसुर ने सितंबर 2026 में किस समझौते के विस्तार के लिए वार्ता शुरू की? -- भारत और मर्कोसुर ने अपने मौजूदा वरीयतापूर्ण व्यापार समझौते (PTA) के विस्तार के लिए वार्ता शुरू की |
| विशेष अभियान 6.0 का मुख्य फोकस क्या है और यह कब चलाया जाएगा? -- इसका मुख्य फोकस ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर है तथा यह 2-31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जाएगा |
| थैलियम कॉपर सेलेनाइड में पहचाने गए तरंग-सदृश ऊष्मा परिवहन का प्रमुख महत्व क्या है? -- यह अपशिष्ट ऊष्मा को अधिक दक्षता से विद्युत में बदलने और तापवैद्युत प्रदर्शन में सुधार की संभावनाएँ खोलता है |
| राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 2025-26 में वित्तीय सेवा विभाग को किस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला? -- वित्तीय सेवा विभाग को 300 से कम कार्मिकों वाले मंत्रालयों एवं विभागों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला |
| 14-16 सितंबर, 2026 के मध्य वायु सेना के पहले ड्रोनाथॉन-2026 का आयोजन कहाँ किया जा रहा है? -- ड्रोनाथॉन-2026 का आयोजन राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया जा रहा है |
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