खाद्य सुरक्षा लाइसेंसिंग में नियामकीय सुधारों को मंजूरी
- 16 Mar 2026
13 मार्च, 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने खाद्य क्षेत्र में व्यवसाय सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय और प्रक्रियात्मक सुधारों को मंजूरी दी।
मुख्य बिंदु
- लाइसेंस की स्थायी वैधता: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी पंजीकरण और लाइसेंस अब स्थायी वैधता (Perpetual Validity) के साथ होंगे।
- इससे समय-समय पर लाइसेंस नवीनीकरण (Renewal) की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
- अनुपालन बोझ में कमी: नई प्रणाली का उद्देश्य कागजी कार्यवाही कम करना, अनुपालन लागत कम करना तथा लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के साथ बार-बार संपर्क की आवश्यकता घटाना है।
- निगरानी पर अधिक ध्यान: नियामकीय एजेंसियाँ अब निगरानी, प्रवर्तन, क्षमता निर्माण पर अधिक ध्यान दे सकेंगी।
- टर्नओवर सीमा में संशोधन: 1 अप्रैल, 2026 से, जिन खाद्य व्यवसायों का वार्षिक कारोबार ₹1.5 करोड़ तक है, उन्हें केवल मूल पंजीकरण की आवश्यकता होगी।
- इससे पहले यह सीमा ₹12 लाख थी।
- लाइसेंसिंग श्रेणियाँ
- ₹50 करोड़ तक वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए राजकीय लाइसेंस आवश्यक होगा।
- ₹50 करोड़ से अधिक कारोबार वाले व्यवसायों को केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
- छोटे व्यवसायों के लिए समर्थन: इन सुधारों से सूक्ष्म एवं लघु खाद्य व्यवसायों के लिए कागजी कार्यवाही, शुल्क, पूर्व-निरीक्षण आवश्यकताएँ कम हो जाएँगी।
- राज्यों की भूमिका सुदृढ़: खाद्य सुरक्षा के नियमन और निगरानी में राज्य सरकारों की भूमिका अधिक मजबूत होगी।
- स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को राहत: जो स्ट्रीट फूड विक्रेता पहले से ही नगर निगम या टाउन वेंडिंग समितियों के साथ पंजीकृत हैं और जो स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 के अंतर्गत आते हैं, उन्हें FSSAI के साथ स्वतः पंजीकृत माना जाएगा।
- विक्रेताओं को लाभ: इस उपाय से 10 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को लाभ मिलने की संभावना है। उन्हें एकाधिक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं रहेगी।
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