साइबर वित्तीय धोखाधड़ी रोकने हेतु I4C-RBIH साझेदारी
- 14 May 2026
13 मई, 2026 को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी एवं म्यूल खातों (Mule Accounts) के विरुद्ध कार्रवाई को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
मुख्य बिंदु
- मुख्य उद्देश्य: इस समझौते का उद्देश्य भारत की बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान प्रणाली में धोखाधड़ी-जोखिम संबंधी खुफिया जानकारी साझा करने, विश्लेषणात्मक सहयोग तथा परिचालन समन्वय को मजबूत करना है।
- AI आधारित धोखाधड़ी पहचान: यह सहयोग AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन टूल्स को समर्थन देगा, जो संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों एवं छिपे हुए म्यूल खातों की पहचान करने में सहायक होंगे।
- सस्पेक्ट रजिस्ट्री का उपयोग: MoU के अंतर्गत I4C अपनी ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ (Suspect Registry) से प्राप्त खुफिया सूचनाएं एवं संदिग्ध पहचान संबंधी डेटा RBIH के साथ साझा करेगा, ताकि AI-संचालित फ्रॉड-रिस्क असेसमेंट मॉडल्स को प्रशिक्षित किया जा सके।
- साइबर अपराध प्रतिक्रिया तंत्र को बल: इस पहल से भारत की साइबर अपराध प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा डिजिटल बैंकिंग एवं भुगतान प्रणालियों में जनविश्वास बढ़ाने की अपेक्षा है।
- I4C की भूमिका: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ‘नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ तथा ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ जैसे प्लेटफॉर्म संचालित करता है, जिनका उद्देश्य साइबर अपराध निगरानी एवं खुफिया साझाकरण को बेहतर बनाना है।
- RBIH की भूमिका: रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार एवं AI-सक्षम धोखाधड़ी पहचान ढांचों को बढ़ावा देता है, ताकि डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा एवं सहनशीलता को मजबूत किया जा सके।
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