सामयिक - 02 June 2026
आप्रवासन एवं विदेशी विषयक (संशोधन) नियम, 2026
1 जून, 2026 को गृह मंत्रालय ने आप्रवासन एवं विदेशी विषयक (संशोधन) नियम, 2026 [Immigration and Foreigners (Amendment) Rules, 2026] को अधिसूचित किया। इसके माध्यम से ‘आप्रवासन एवं विदेशी विषयक नियम, 2025’ के तहत पंजीकरण की समय-सीमा और अपील प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
- पंजीकरण की संशोधित समय-सीमा: ऐसे विदेशी नागरिक जिनके पास 180 दिन या उससे कम समय का वीजा है, यदि वे भारत में अपनी तय अनुमति अवधि से अधिक समय तक रुकना चाहते हैं, तो उन्हें अब 180 दिन की अवधि समाप्त होने से पहले ही अपना पंजीकरण कराना होगा।
- पुराना नियम क्या था: पूर्व के नियम के अनुसार, भारत आने के बाद 180 दिन पूरे होने पर अगले 14 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने की छूट दी गई थी।
- आपातकालीन प्रावधान: संशोधित नियमों में यह साफ किया गया है कि इस प्रकार की विस्तारित अवधि के पंजीकरण की अनुमति केवल आपातकालीन या विशेष परिस्थितियों (Emergent Circumstances) में ही प्रदान की जाएगी।
- एक भारतीय माता-पिता वाले बच्चों को राहत: यदि माता या पिता में से कोई भी एक भारत का नागरिक है और वे बच्चे के लिए भारतीय नागरिकता ही बनाए रखना चाहते हैं, तो बच्चे के जन्म के 30 दिनों के भीतर अधिकारियों को सूचित करने की अनिवार्यता उन पर लागू नहीं होगी।
- विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर: यदि ऐसा कोई बच्चा बाद में भारत में रहते हुए किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता है, तो माता-पिता के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे इसकी सूचना 30 दिनों के भीतर पंजीकरण अधिकारी को दें।
केंद्र सरकार ने लॉन्च किया राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान'
1 जून, 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने किसानों के बीच मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया।
मुख्य बिंदु
- मुख्य उद्देश्य: इस अभियान का उद्देश्य कृषि भूमि का संरक्षण करना, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाना तथा सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।
- मृदा संरक्षण पर ध्यान: किसानों को मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जल संरक्षण तकनीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: इस पहल के तहत रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के तरीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- संस्थागत भागीदारी: इस राष्ट्रव्यापी अभियान में कृषि विश्वविद्यालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs), राज्य के कृषि विभाग और जनप्रनिधि मिलकर काम करेंगे।
- नकली कृषि इनपुट्स के खिलाफ जागरूकता: किसानों को नकली उर्वरकों, बीजों तथा कीटनाशकों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- सरकारी योजनाओं तक पहुंच: यह अभियान किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), दलहन-तिलहन मिशन और कृषि यंत्रीकरण कार्यक्रमों जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद करेगा।
‘महा वॉटर कार्यक्रम’ का शुभारंभ
1 जून, 2026 को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) तथा जल शक्ति मंत्रालय ने भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए नवाचार, स्टार्टअप्स और अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु ‘मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज (MAHA) फॉर वॉटर’ नामक कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य बिंदु
- मिशन का उद्देश्य: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में होने वाले शोध और ज़मीनी स्तर पर तकनीक की तैनाती (Field Deployment) के बीच के अंतर को पाटना है, ताकि बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर के जल समाधान विकसित किए जा सकें।
- वित्तीय परिव्यय: जल क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को सहायता देने के लिए इस मिशन का कुल बजट ₹200 करोड़ निर्धारित किया गया है।
- प्राथमिकता वाले 5 क्षेत्र:
- जल संसाधन मूल्यांकन और सतत प्रबंधन।
- पेयजल (Drinking Water) सुरक्षा।
- जल की गुणवत्ता और पारिस्थितिक स्वास्थ्य।
- जल-उपयोग दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)।
- जलवायु लचीलापन और अनुकूलन (Climate Resilience & Adaptation)।
- फंडिंग सहायता: चयनित बहुविषयक कंसोर्टियम को प्रौद्योगिकी विकास, परीक्षण, प्रमाणीकरण तथा क्षेत्रीय क्रियान्वयन के लिए 20 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।
- पात्र प्रतिभागी: इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, अनुसंधान संस्थान, स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs) और औद्योगिक भागीदार हिस्सा ले सकते हैं।
सामयिक खबरें पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण
छिपकली की नई प्रजाति ‘मेसालिना बिश्नोई’ की खोज
जून 2026 में वैज्ञानिकों ने राजस्थान में छिपकली की एक नई प्रजाति ‘मेसालिना बिश्नोई’ (Mesalina bishnoi) की खोज की घोषणा की।
मुख्य बिंदु
- खोज का स्थान: यह नई प्रजाति बीकानेर जिले के गजनेर के पास खोजी गई है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और सहयोगी संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा इसका औपचारिक विवरण तैयार किया गया है।
- नामकरण का कारण: वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बिश्नोई समुदाय के दीर्घकालिक और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के लिए इस प्रजाति का नाम ‘मेसालिना बिश्नोई’ रखा गया है।
- शारीरिक बनावट: यह एक छोटे आकार की छिपकली है, जिसकी लंबाई लगभग 39.2 मिमी है।
- रंग और धारियाँ: इसका रंग धूसर (ग्रे) से जैतूनी-भूरा (ऑलिव-ब्राउन) तक होता है तथा इसकी एक प्रमुख पहचान गर्दन से पूंछ की ओर बढ़ने वाली विशिष्ट पार्श्वीय धारियां (Dorsolateral Stripes) हैं।
- विशिष्ट पहचान: इस प्रजाति की आंखों के पीछे काले रंग के निशान हैं और पूरे शरीर पर सफेद धब्बों के साथ अनियमित गहरे रंग के चकत्ते (Dark blotches) मौजूद हैं।
- निचला हिस्सा: इसके शरीर का निचला हिस्सा हल्के भूरे (Pale grey) से लेकर मटमैले सफेद (Off-white) रंग का है।
- आवास (Habitat): यह प्रजाति मुख्य रूप से पथरीली मिट्टी और विरल (कम) मरुस्थलीय वनस्पतियों वाले शुष्क और रेतीले इलाकों में पाई जाती है।
| हाल ही में राजस्थान में खोजी गई किस छिपकली प्रजाति का नाम बिश्नोई समुदाय के वन्यजीव संरक्षण में योगदान के सम्मान में रखा गया है? -- मेसालिना बिश्नोई |
| हाल ही में राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ मध्य प्रदेश के किस गांव से किया गया? -- रामसिया गांव |
| हाल ही में अधिसूचित आप्रवासन एवं विदेशी विषयक (संशोधन) नियम, 2026 के अनुसार, निर्धारित अवधि से अधिक समय तक भारत में रहने की इच्छा रखने वाले विदेशी नागरिकों को कितने दिनों की अवधि पूर्ण होने से पहले पंजीकरण कराना होगा? -- 180 दिन |
| हाल ही में किस संस्था ने देश भर के अपने सभी अस्पतालों और औषधालयों में एक केंद्रीकृत ऑनलाइन रोगी फीडबैक प्रणाली की शुरुआत की है? -- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) |
दैनिक समसामयिकी
पुराने करंट अफेयर्स देखने के लिए, कृपया नीचे तिथि चुनें


