रूस-यूक्रेन संघर्ष विराम पर UNGA प्रस्ताव से भारत अनुपस्थित
- 25 Feb 2026
24 फरवरी, 2026 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त संघर्ष विराम की मांग करने वाले प्रस्ताव पर मतदान के दौरान भारत अनुपस्थित रहा।
मुख्य बिंदु
- पारित प्रस्ताव: “यूक्रेन में स्थायी शांति के लिए समर्थन” (Support for Lasting Peace in Ukraine) शीर्षक वाले इस मसौदा प्रस्ताव को 193 सदस्यीय महासभा ने 107 समर्थकों, 12 विरोधियों और 51 अनुपस्थित देशों के साथ पारित कर दिया।
- अनुपस्थित देशों में भारत शामिल: भारत उन 51 देशों में शामिल था, जिन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका जैसे देशों ने भी दूरी बनाए रखी।
- संघर्ष विराम का आह्वान: प्रस्ताव में तत्काल और व्यापक संघर्ष विराम का आग्रह किया गया और अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप न्यायसंगत एवं स्थायी शांति प्राप्त करने पर बल दिया गया।
- यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन: इस प्रस्ताव ने यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
- मानवीय चिंताओं पर बल: प्रस्ताव में नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण ऊर्जा केन्द्रों पर जारी हमलों के साथ-साथ बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
- विश्वास-निर्माण के उपाय: इसमें युद्धबंदियों के पूर्ण आदान-प्रदान, अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की रिहाई और बच्चों सहित जबरन स्थानांतरित किए गए नागरिकों की वापसी का आह्वान किया गया।
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
राष्ट्रीय
- राजनीति और प्रशासन
- अवसंरचना
- आंतरिक सुरक्षा
- आदिवासियों से संबंधित मुद्दे
- कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- कार्यकारी और न्यायपालिका
- कार्यक्रम और योजनाएँ
- कृषि
- गरीबी और भूख
- जैवविविधता संरक्षण
- पर्यावरण
- पर्यावरण प्रदूषण, गिरावट और जलवायु परिवर्तन
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- बैंकिंग व वित्त
- भारत को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
- भारतीय अर्थव्यवस्था
- रक्षा और सुरक्षा
- राजव्यवस्था और शासन
- राजव्यवस्था और शासन
- रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- शिक्षा
- सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय
- स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे



