सामयिक - 04 August 2026
फुटपाथों को सुरक्षित एवं अतिक्रमण-मुक्त रखना अनिवार्य: SC
3 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी प्राधिकरणों को पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट रूप से चिह्नित स्थान सुनिश्चित करने तथा उन्हें अतिक्रमण-मुक्त रखने का निर्देश दिया। न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि नागरिकों को सुरक्षित एवं निर्बाध फुटपाथों पर चलने का अधिकार प्राप्त है।
मुख्य बिंदु
- पैदल यात्री सुरक्षा: न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट रूप से चिह्नित एवं सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होना चाहिए।
- प्रशासनिक जिम्मेदारी: स्थानीय निकायों को नए ढाँचे के निर्माण की अनिवार्यता के बिना मौजूदा पैदल मार्गों की पहचान कर उनका संरक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
- संवैधानिक आधार: यह निर्देश 19 जून, 2026 के उस निर्णय के अनुरूप है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चिह्नित फुटपाथों पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था।
- महत्त्व: न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भी समान रूप से उत्तरदायी हैं।
केंद्र ने दोपहिया एम्बुलेंस हेतु नियमों का मसौदा जारी किया
3 अगस्त, 2026 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने दोपहिया एम्बुलेंस तथा वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle-V2V) संचार प्रणाली के लिए नियमों के मसौदे संबंधी दो अधिसूचनाएँ जारी कीं, जिनका उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं एवं सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है।
मुख्य बिंदु
- मसौदा संशोधन: मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (CMVR) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
- दोपहिया एम्बुलेंस: मसौदे में L2 श्रेणी की दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के लिए नियामक ढाँचा प्रस्तावित किया गया है, जिससे विशेषकर ग्रामीण, दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बेहतर होगी।
- सुरक्षा मानक: प्रस्तावित नियमों में रोगी परिवहन इकाई, स्ट्रेचर लॉकिंग प्रणाली, ब्रेकिंग, स्थिरता, आपातकालीन चेतावनी लाइट, अग्निशामक यंत्र एवं रोगी सुरक्षा के मानक निर्धारित किए गए हैं।
- V2V संचार प्रणाली: मसौदे में गति, स्थिति, दिशा एवं त्वरण जैसी सूचनाओं के वास्तविक समय आदान-प्रदान हेतु चरणबद्ध तरीके से वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है।
- सुरक्षा लाभ: यह प्रणाली आपातकालीन ब्रेक चेतावनी, अग्रिम टक्कर चेतावनी, गलत दिशा में वाहन चलाने की चेतावनी तथा आपातकालीन वाहन चेतावनी जैसी सुविधाओं को सक्षम बनाएगी।
भारत एवं उज़्बेकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया
3 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान भारत एवं उज़्बेकिस्तान ने महत्त्वपूर्ण खनिजों, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना तथा शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
मुख्य बिंदु
- विस्तारित सहयोग: दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स, दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earths), खनन, व्यापार, ऊर्जा, अवसंरचना, रक्षा, शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है तथा दोनों देशों ने इसे और अधिक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- सुरक्षा सहयोग: दोनों देशों ने सीमा-पार आतंकवाद, उग्रवाद एवं मादक पदार्थों की तस्करी सहित आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- बहुपक्षीय सहयोग: उज़्बेकिस्तान ने ब्रिक्स (BRICS) 2026 की भारतीय अध्यक्षता के दौरान भारत की पहलों का समर्थन किया, जबकि भारत ने 2027–2029 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता हेतु उज़्बेकिस्तान की उम्मीदवारी का समर्थन किया।
सामयिक खबरें विज्ञान प्रौद्योगिकी
IIT पटना ने विकसित किया हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर
अगस्त 2026 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर (Hybrid Magneto-Rheometer) विकसित किया है। यह उपकरण मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रवों का सटीक परीक्षण करने में सक्षम है, जिससे उद्योग एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्मार्ट पदार्थों (Smart Materials) के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: यह उपकरण संयुक्त संपीड़न (Compression) एवं अपरूपण बल (Shear Force) की परिस्थितियों में मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रवों के रियोलॉजिकल (प्रवाह एवं विरूपण) तथा ट्राइबोलॉजिकल (घर्षण एवं घिसाव) गुणों का परीक्षण करता है।
- प्रमुख नवाचार: यह अपेक्षाकृत कम विद्युत धारा का उपयोग कर उच्च-तीव्रता का स्थिर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिससे वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में अधिक सटीक परीक्षण संभव होता है।
- अनुप्रयोग: यह तकनीक ब्रेक, क्लच, शॉक एब्जॉर्बर, डैम्पर, एक्ट्यूएटर, कंपन नियंत्रण प्रणालियों तथा चिकित्सा उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक होगी।
- व्यापक महत्त्व: इस उपकरण का उपयोग पॉलिमर, औषधि, खाद्य प्रसंस्करण, सौंदर्य प्रसाधन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योगों में प्रयुक्त विस्कोइलास्टिक पदार्थों के अध्ययन में भी किया जा सकेगा।
सामयिक खबरें पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण
अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील: भारत का 101वाँ रामसर स्थल
3 अगस्त, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की गई घोषणा के अनुसार अरुणाचल प्रदेश स्थित ग्लॉ झील (Glaw Lake) भारत का 101वाँ रामसर स्थल (Ramsar Site) बन गया है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश को अपना प्रथम रामसर स्थल प्राप्त हुआ।
मुख्य बिंदु
- स्थान: यह मीठे पानी की झील पूर्वी हिमालय में कमलांग टाइगर रिज़र्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत स्थित है।
- पारिस्थितिक महत्त्व: यह आर्द्रभूमि एवं इसका जलग्रहण क्षेत्र 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियों तथा 49 ऑर्किड प्रजातियों का संरक्षण करता है, जिससे यह एक महत्त्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट है।
- महत्त्व: रामसर दर्जा मिलने से आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।
- भारत की प्रगति: भारत में रामसर स्थलों की संख्या वर्ष 2014 में 26 से बढ़कर अब 101 हो गई है।
| हाल ही में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना में दोपहिया एम्बुलेंस के लिए किस श्रेणी का नियामक ढाँचा प्रस्तावित किया गया है तथा इसका प्रमुख उद्देश्य क्या है? -- मसौदे में L2 श्रेणी की दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के लिए नियामक ढाँचा प्रस्तावित किया गया है, जिससे विशेषकर ग्रामीण, दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बेहतर बनाई जा सके |
| हाल ही में IIT पटना द्वारा विकसित हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर का प्रमुख उद्देश्य क्या है तथा यह किन प्रकार के द्रवों के गुणों का परीक्षण करता है? -- इसका उद्देश्य मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रवों के प्रवाह एवं विरूपण तथा घर्षण एवं घिसाव (ट्राइबोलॉजिकल) गुणों का संयुक्त संपीड़न एवं अपरूपण बल की परिस्थितियों में सटीक परीक्षण करना है |
| भारत के 101वें रामसर स्थल के रूप में घोषित ‘ग्लॉ झील’ किस संरक्षित क्षेत्र में स्थित है तथा यह किन जैव विविधताओं के कारण महत्त्वपूर्ण मानी जाती है? -- यह पूर्वी हिमालय के कमलांग टाइगर रिज़र्व एवं वन्यजीव अभयारण्य में स्थित है तथा 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियों एवं 49 ऑर्किड प्रजातियों का संरक्षण करने वाला महत्त्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट है |
| किस प्रशांत महासागरीय द्वीपीय राष्ट्र ने अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं विरासत को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के उद्देश्य से आधिकारिक रूप से अपना नाम बदल लिया है? -- प्रशांत महासागर स्थित द्वीपीय राष्ट्र ‘नौरू’ ने अपना आधिकारिक नाम बदलकर ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ कर लिया है; यह विश्व का तीसरा सबसे छोटा देश है |
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