जलयुक्त शिवर अभियान का समाप्ति

  • हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने प्रमुख जल संरक्षण परियोजना-जलयुक्त शिवर को समाप्त कर दिया।

परियोजना को समाप्त करने के कारण

  • भ्रष्टाचार: महाराष्ट्र में पिछली सरकार के ख़िलाफ़ लगाए गए मुख्य भ्रष्टाचार आरोपों में से एक जलयुक्त शिवर परियोजना थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जनवरी-2019 में 10,094 कार्यों को पूरा करने की घोषणा की थी। लेकिन मार्च मेंजलयुक्त शिवर योजना के तहत किए गए 1,300 कार्यों के ख़िलाफ़ विसंगतियों के आरोप लगाए गए थे, जिसे तत्कालीन सरकार ने बाद में स्वीकार कर लिया था।
  • अनुचित निधि आवंटन: एक अन्य कारण योजना के अंतिम चरण के दौरान अनुचित निधि आवंटन है, जिसके कारण पिछले तीन वर्षों के दौरान काम की घटिया गुणवत्ता को अंजाम दिया गया।
  • नीतीयोग रिपोर्ट: NITI Aayogके समग्र जल प्रबंधन सूचकांक -2019 के अनुसार, मौजूदा जल स्रोतों को संरक्षित करने में महाराष्ट्र का प्रदर्शन, अतिक्रमित जल निकायों को बहाल करना, नहरों और सिंचाई प्रबंधन के माध्यम से जल वितरण 2015 तक खराब हो गया है। जलयुक्त शिवर कार्यक्रम के बावजूद, राज्य भूजल पुनर्भरण में खराब प्रदर्शन किया है। इस परियोजना को रद्द करने के सरकार के निर्णय को स्वीकार किया गया।

 जलयुक्त शिवर

  • महाराष्ट्र में लगातार सूखे का अनुभव होने के बाद दिसंबर 2014 में इसकी शुरूआतकी गयी। इस परियोजना का उद्देश्य उन उपायों को शामिल करना था जो सबसे सूखा प्रभावित गाँवों में व्यवस्थित रूप से पानी की कमी को दूर कर सके।

उद्देश्य

  • गांव क्षेत्र में अधिकतम अपवाह को संग्रहितकरना
  • जल विकेंद्रीकृत निकायों का निर्माण करना
  • सूखा क्षेत्रों में भूजल स्तर को बढ़ाना
  • मरम्मत और जीर्णोद्धार के माध्यम से विलेज टैंक, परकोलेशन टैंक, सीमेंट नाला बंद (CNB) जैसी विभिन्न मौजूदा संरचनाओं की जल भंडारण क्षमता का कायाकल्प
  • लोगों की भागीदारी के माध्यम से गाद को हटाकर जल निकायों की भंडारण क्षमता को बढ़ाना।
  • जल बजट की अवधारणा को संवेदनशील बनाना

जलयुक्त शिवहर की आवश्यकता

  • 2014 के बाद सेमराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ के सैकड़ों गाँवों ने लगातार सूखे को झेलाहै।
  • महाराष्ट्र का लगभग 82 प्रतिशत क्षेत्र वर्षा आधारित क्षेत्र है जबकि 52 प्रतिशत क्षेत्र सूखा ग्रस्त है। जब मानसून के दौरान अस्थिर प्राकृतिक वर्षा और लंबीअवधि तक शुष्क मौसम एक साथ युग्मित होता हैतो यह कृषि गतिविधियों को गंभीर रूप से बाधित करता है।

प्रमुख विशेषताऐं

  • यह परियोजना मौजूदा जल संसाधनों को मजबूत और सुव्यवस्थित बनाने कों लेकर केंद्रित है। जैसे मानसून सत्र के दौरान नहरों, बाँधों और तालाबों के ज़रिए वर्षा के जल को एकत्रित करना।
  • प्राकृतिक जल धाराओं को और अत्यधिक चौड़ा व गहरा करना, साथ ही साथ उन्हें आस-पास के जल भंडारण की सुविधाओं (जैसे-मिट्टी या कंक्रीट का डैम प्रस्तावित किया गया है) से जोड़ना।

जलयुक्त शिवर की सफलता

  • जनवरी 2019 तकइस योजना ने महाराष्ट्र के 16,000 सूखाग्रस्त गांवों को बदल दिया था। सिंचाई क्षेत्र को 34 लाख हेक्टेयर बढ़ाया गया था। इस प्रक्रिया मेंहर साल फसल की पैदावार बढ़ रही थी, विशेष रूप से ख़रीफ़ की फसल। इन हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप 2019 के मध्य तक24 लाख ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी का संग्रहण हुआ।
  • योजना को प्राप्त करने वाले गांवों ने इस योजना को गेम चेंजर कहा, लेकिन आलोचकों ने इसकी स्थिरता, ठेकेदार आधारित मॉडल और यहां तक ​​कि इस योजना की उपयोगिता दिखाने के लिए डेटा एकत्र करने की कमी जैसे मुद्दों को उठाया।जबकि राज्य द्वारा संचालित भूजल और सर्वेक्षण विकास एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि 31,000 गाँवों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया था

महाराष्ट्र में जल संरक्षण का भविष्य

  • परियोजना को लागू करने पर काम करने वाले भूवैज्ञानिकों और हाइड्रोलॉजिस्टने इस योजना पर एक समान विचार साझा किए और जलयुक्त शिवर कार्यक्रम का स्वागत किया। यह मुख्य रूप से
  • हालांकि, विशेषज्ञों ने इस बात से सहमति ज़ाहिर की कि योजना उचित तरीके से लागू नहीं की गई थी। अब जलयुक्त शिवर अस्तित्व में नहीं है, पिछले पांच वर्षों का केंद्रित कथक प्रयास और सब कुछ किया धरा गर्त में चला जायेगा जब तक एक समान योजना नहीं लाई जाती।
  • वर्षा की विविधताएं अधिक स्पष्ट होने के कारणभूजल भंडार में गिरावट आ रही है। अतः राज्य को अपनी भविष्य की पानी की आवश्यकताओं से निपटने के लिए ठोस हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी

स्रोत : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ऑनलाइन. फरवरी 2020