FDI नीति में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
- 11 Mar 2026
10 मार्च, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन देशों से होने वाले निवेशों के संबंध में भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति (FDI Policy) में संशोधन को मंजूरी दी, जिनकी भारत के साथ स्थलीय सीमा लगती है।
मुख्य बिंदु
- वास्तविक स्वामी की परिभाषा (Beneficial Owner): नीति में “वास्तविक स्वामी (BO)” की औपचारिक परिभाषा और निर्धारण के मानदंड जोड़े गए हैं।
- यह परिभाषा धन शोधन निवारण नियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप है।
- वास्तविक स्वामित्व सीमा: यदि स्थलीय सीमा से लगे देशों के निवेशकों की गैर-नियंत्रणकारी वास्तविक हिस्सेदारी 10% तक है, तो ऐसे निवेश अब स्वचालित मार्ग से अनुमति प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि यह अनुमति क्षेत्रीय सीमा और अनुपालन आवश्यकताओं के अधीन होगी।
- अनिवार्य प्रकटीकरण: ऐसे निवेशों के मामले में निवेश प्राप्त करने वाली कंपनी को संबंधित जानकारी/विवरण उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) को रिपोर्ट करना होगा।
- त्वरित अनुमोदन प्रणाली: इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन तथा इन्गट-वेफर के निर्माण से संबंधित निर्दिष्ट क्षेत्रों/गतिविधियों में एलबीसी निवेश के प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर संसाधित कर निर्णय लिया जाएगा।
- स्वामित्व सुरक्षा: इन मामलों में निवेश प्राप्त करने वाली इकाई में बहुसंख्यक शेयरधारिता और नियंत्रण हमेशा भारतीय निवासी नागरिकों और/या भारतीय निवासी संस्था के पास होगा, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण भारतीय निवासी नागरिक के हाथ में होगा।
- पृष्ठभूमि: कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के मौकापरस्त नियंत्रण/अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए, सरकार ने 17.04.2020 के प्रेस नोट 3 (2020) के माध्यम से मौजूदा FDI नीति में संशोधन किया था।
- पीएन3 के अनुसार, भारत के साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देश की कोई भी इकाई, या जहाँ भारत में होने वाले निवेश का वास्तविक मालिक ऐसे किसी देश में स्थित हो या उसका नागरिक हो, वह केवल सरकारी मार्ग के तहत ही निवेश कर सकता है।
- निवेश फंड पर प्रभाव: सरकार ने पाया कि इस प्रतिबंध का प्रभाव उन वैश्विक निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंडों पर भी पड़ा, जिनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों की छोटी और गैर-नियंत्रणकारी हिस्सेदारी थी।
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