विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) दिशा-निर्देश 2026
- 07 May 2026
6 मई, 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में ‘विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) दिशा-निर्देश 2026’ जारी किये।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: भारत के लगभग 15 लाख स्कूलों में स्कूल प्रशासन, जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाना।
- NEP 2020 का कार्यान्वयन: इस ढांचे को शिक्षा में मजबूत स्थानीय भागीदारी के माध्यम से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) 2020 के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- विद्यालय प्रबंधन समितियों की भूमिका: बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए SMCs को छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों और स्थानीय समुदायों के बीच एक सेतु के रूप में देखा गया है।
- बाल कल्याण पर ध्यान: ये दिशा-निर्देश शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक भलाई, समावेशिता और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए समर्थन पर ज़ोर देते हैं।
- सामुदायिक स्वामित्व: इस पहल का उद्देश्य SMCs को एक ऐसे स्थायी जन आंदोलन में बदलना है जो विद्यालय सुधार में साझा ज़िम्मेदारी को बढ़ावा दे।
- जनभागीदारी को पुनर्जीवित करना: ‘विद्यांजलि’ (Vidyanjali) जैसी पहलों से प्रेरणा लेते हुए, ये दिशा-निर्देश शिक्षा के क्षेत्र में समाज की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
- विस्तारित ज़िम्मेदारियां: मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और अनुदान की निगरानी पर केंद्रित पहले के SMC ढांचों के विपरीत, नए दिशा-निर्देशों में ज़िम्मेदारियों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें अब शैक्षणिक गुणवत्ता, बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और अधिगम परिणामों को भी शामिल किया गया है।
- ‘मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता’ तथा ‘डिजिटल गवर्नेंस’ पर फोकस: यह ढांचा मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता [Foundational Literacy and Numeracy (FLN)], पारदर्शिता, डिजिटल गवर्नेंस और समावेशी शिक्षा प्रथाओं को प्राथमिकता देता है।
- व्यापक दृष्टिकोण: यह पहल मजबूत शैक्षिक नींव और समुदाय के नेतृत्व वाले स्कूल परिवर्तन के माध्यम से 2047 तक भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के दीर्घकालिक लक्ष्य के भी अनुरूप है।
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