उच्च स्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी) रिपोर्ट

  • हाल ही में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने उच्च स्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी) की रिपोर्ट जारी की।
  • मौजूदा वैश्विक व्यापार परिदृश्य में चुनौतियों और अवसरों का पता लगाने के लिए सुरजीत एस भल्ला के नेतृत्व में एचएलएजी का गठन सितंबर, 2018 में किया गया था।

सदस्य

  • सुब्रमण्यम जयशंकर, राजीव खेर, संजीव सान्याल, आदिल जैनुल भाई, हर्षवर्धन सिंह, शेखर शाह, विजय चौथावले, पुलोक घोष, जयंत दासगुप्ता, राजीव के लूथरा, चंद्रजीत बनर्जी।

उद्देश्य

  • वैश्विक परिदृश्य का आकलन करने और वैश्विक व्यापार एवं सेवाओं के व्यापार में भारत की हिस्सेदारी और महत्व को बढ़ाने के लिए सिफारिशें प्रदान करना।
  • द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर दबाव का प्रबंधन करना और नई पीढ़ी के नीति निर्माण को मुख्य धारा में लाना।

प्रमुख सिफारिशें

निर्यात के लिए एक्जिम बैंक और क्रेडिट बीमा

  • एक्जिम बैंक के पूंजी आधार को 2022 तक अन्य 20,000 करोड़ रुपये से बढ़ाना और शेष पूंजी को निरंतर तरीके से बढ़ाना।
  • नेट स्वामित्व फंड में बैंक की उधार सीमा (वर्तमान सीमा 10 गुना है) को 20 गुना बढ़ाना।
  • निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) का पूंजीगत आधार 350 करोड़ रुपये तक बढ़ाना।
  • बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) नियमों से ईसीजीसी को छूट।

प्रभावी कॉर्पोरेट कर दरों को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना

  • भारत को कॉर्पोरेट कर की दर को 22% (छूट के साथ) में कटौती करनी चाहिए। इससे 18% प्रभावी कॉर्पोरेट कर की दर प्राप्त होगी।

प्रतियोगियों के साथ पॉलिसी दर संरेखण

  • भारत को 10 सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले ओईसीडी देशों की औसत पूंजी को कम करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
  • नीति संचालन को अब प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की तकनीक को पूरी तरह से शामिल करना चाहिए।
  • रेपो दरों में सरकारी बचत योजनाओं की लिंक को फिर से स्थापित करना।

व्यापक निर्यात रणनीति बनाना

  • डेटाबेस जो विभिन्न एफटीए, आरटीए, सीईपीए आदि के उपयोग का विवरण देता है, तैयार करना।
  • 4-अंकीय हार्मोनाइज्ड सिस्टम (एचएस) स्तर पर वस्तुओं की पहचान के लिए बड़े डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करना जहां भारत को निर्यात लाभ होता है और इन उत्पादों में घरेलू प्रतिस्पर्धा का निर्माण होता है।

निवेश संवर्धन एजेंसी (निवेश भारत++) का सुदृढ़ीकरण

  • निवेश भारत को लाइसेंस जारी करने के लिए केंद्रीकृत प्राधिकरण बनाना और पूर्व-निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले मामलों में प्रोत्साहन देने के लिए इसे सशक्त बनाना।
  • डीजीएफटी, आईटीपीओ, टीसीपीआई के स्थान पर एक अलग इकाई के रूप में एक शीर्ष व्यापार संवर्धन संगठन बनाना।
  • एकल-खिड़की निस्तारण (सिंगल-विंडो क्लीयरेंस) को साधने के लिए एक विश्वस्तरीय ‘वॉर रूम’ बनाना।

मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ताओं में सुधार

  • गैर-टैरिफ अवरोधों की पहचान करने और हल करने की प्रक्रिया शुरू करना, जो प्रमुख आयातक देशों तक भारतीय निर्यात को पहुंचने से रोकते हैं - उन प्रमुख देशों के साथ शुरू करना जिनके साथ भारत का एफटीए है।
  • बेहतर एफटीए में मदद करने के लिए पंसदीदा बाजारों में भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धा का आकलन करने के लिए क्षेत्रीय विश्लेषण का मूल्यांकन करना।
  • पूरकता और दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर पहचाने गए एफटीए वार्ता के लिए पंचवर्षीय कार्यक्रम लांच करना।

एलीफैंट बांड जारी करना

  • एलीफैंट बांड जारी कर भारत के विदेशों में जमा काले धन का 500 बिलियन डॉलर तक प्राप्त किया जा सकता है।
  • अघोषित आय की घोषणा करने वाले लोग 20-30 वर्षों की अवधि के लिए 5% की कूपन दर के साथ 40% निवेश करने के लिए बाध्य होंगे। फंड का इस्तेमाल केवल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

वित्तीय सेवा क्षेत्र में सुधार

  • भारत के निधि प्रबंधन गतिविधि को संभालने के लिए विदेशी निवेश कोषों और व्यक्तिगत निवेशकों हेतु विनियामक एवं कर ढांचे को सरल बनाना।

भारत का आरसीईपी में शामिल होना जरूरी

  • पैनल भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल होने के पक्ष में है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन द्विपक्षीय व्यापार युद्ध में लिप्त होने पर आरसीईपी जैसे मुक्त व्यापार क्षेत्र में शामिल होकर भारत और भी अधिक लाभान्वित हो सकता है।
  • यह रिपोर्ट प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) के लिए वार्ता के साथ आगे बढ़ने के नरेंद्र मोदी सरकार के संकल्प को मजबूत करेगी।

 

सेक्टर विशिष्ट सिफारिशें

कृषि

  • मॉडल कृषि उपज और पशुधन विपणन अधिनियम, 2017 का कार्यान्वयन तेजी से किया जाना चाहिए।
  • चावल और अनाज के बजाय फलों और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देना।
  • कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र में एफडीआई को सुगम बनाना।
  • उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आकलन का निर्माण करना।

औषधीय, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सकीय उपकरण

  • विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को सक्षम बनाने के लिए औषधीय और जैव प्रौद्योगिकी पर एक सशक्त स्वतंत्र आयोग नियुक्त करना।
  • दवाओं / सौंदर्य प्रसाधनों से चिकित्सा उपकरणों का अलग से विनियमन।
  • संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में चिकित्सकीय उपकरणों के नियमन के लिए एकल मंत्रालय बनाना।
  • भारत में निर्मित चिकित्सकीय उपकरणों पर प्रतिलोमित शुल्क संरचना में सुधार करना।

वस्त्र और परिधान

  • सेक्टर के लिए निर्यात से पूंजीगत वस्तु निर्यात संवर्धन (ईपीसीजी) योजना को अलग करना।
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (टीयूएफएस) सब्सिडी का तेजी से वितरण करना।

इलेक्ट्रानिक्स

  • इलेक्ट्रॉनिक्स के विनिर्माण के लिए टैरिफ-आधारित नीति से प्रोत्साहन-आधारित नीति में बदलाव।
  • औद्योगिक पार्क स्थापित करना जो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

पर्यटन और आतिथ्य

  • सरकार और उद्योग के विभिन्न हिस्सों के बीच समन्वय के लिए अखिल भारत पर्यटन बोर्ड बनाना।
  • पर्यटन अवसंरचना को सामंजस्य अवसंरचना का दर्जा।
  • चिकित्सा वीजा व्यवस्था को सरल बनाना।
  • जागरूकता फ़ैलाने और चिकित्सीय मूल्य गंतव्य के रूप में भारत के ब्रांड निर्माण के लिए एक चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) अभियान बनाना।

महत्व

  • आर्थिक विकास का मार्ग: यह भारत के लिए उपलब्ध सभी अवसरों को अंगीकार करके एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनने का मार्ग प्रशस्त करता है ताकि भारत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1 ट्रिलियन डॉलर के योगदान के निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम हो।
  • भारतीय निर्यात को बढ़ावा देना: एचएलएजी की सिफारिशों से सरकार को 2018 में 500 बिलियन डॉलर से 2025 में 1,000 बिलियन डॉलर से अधिक वस्तुओं और सेवाओं के भारत के निर्यात को दोगुना करने में मदद मिलेगी।
  • महत्वपूर्ण नीतियों पर जोर: रिपोर्ट उन नीतियों से संबंधित है जो भारत को निर्यात वृद्धि (और परोक्ष रूप से जीडीपी वृद्धि) की अपनी क्षमता की ओर आक्रामक रूप से बढ़ने के लिए मैक्रो और माइक्रो, विनियामक और कराधान, बुनियादी ढांचा विकास, नौकरशाही का हस्तक्षेप और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस की आवश्यकता है।

स्रोत : सिविल सर्विसेस क्रॉनिकल ऑनलाइन, नवंबर, 2019