राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन

  • 26 फरवरी 2020 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की स्थापना की मंज़ूरी दी।
  • इस मिशन को पूरा करने के लिए 4 सालों का समय निश्चित किया गया है, वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2023-24 तक।

लक्ष्य

  • अनुसंधान, निर्यात और तकनीकी विकास का बढ़ावा देने के लिए
  • विनिर्माण सुविधाओं और तकनीकी वस्त्र को मजबूती देना
  • वस्त्र तकनीकी के आयात को कमतर करना

मिशन की ज़रूरत

  • निवेश में कमी: भारत में तकनीकी वस्त्रों की पहुँच काफी कम (मात्र 5 से 10 प्रतिशत) है, जबकि विकसित देशों में यह आँकड़ा 30 से 70 प्रतिशत के आस-पास है।
  • विश्व बाजार में मामूली शेयर: भारतीय तकनीकी वस्त्र बाज़ार का अनुमानित आकार 16 अरब डॉलर है जो 250 अरब डॉलर के वैश्विक तकनीकी वस्त्र बाज़ार का लगभग 6 प्रतिशत है।

मुख्य विशेषताएं

इस मिशन के मुख्यतः 4 घटक हैं:

प्रथम घटक

अनुसंधान, नवाचार और विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

  • इस घटक के तहत (1) कार्बन, फाइबर, अरामिड फाइबर, नाइलॉन फाइबर और कम्‍पोज़िट में अग्रणी तकनीकी उत्‍पादों के उद्देश्‍य से फाइबर स्‍तर पर मौलिक अनुसंधान (2) भू-टेक्‍सटाइल, कृषि-टेक्‍सटाइल, चिकित्‍सा-टेक्‍सटाइल, मोबाइल-टेक्‍सटाइल और खेल-टेक्‍सटाइल के विकास पर आधारित अनुसंधान अनुप्रयोगों दोनों को प्रोत्‍सा‍हन दिया जाएगा।

द्वितीय घटक

  • संवर्द्धन और विपणन विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा
  • इस घटक का उद्देश्य बाज़ार विकास, बाज़ार संवर्द्धन, अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सहयोग, निवेश प्रोत्साहन और 'मेक इन इंडिया' पहल के माध्यम से प्रतिवर्ष 15 से 20 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ घरेलू बाज़ार के आकार को वर्ष 2024 तक 40 से 50 अरब डॉलर करना है।

तृतीय घटक

  • निर्यात संवर्द्धन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा
  • इस घटक के तहत तकनीकी वस्त्रों के निर्यात को बढ़ाकर वर्ष 2021-22 तक 20,000 करोड़ रुपए किये जाने का लक्ष्य है जो कि वर्तमान में लगभग 14,000 करोड़ रुपए है। साथ ही वर्ष 2023-24 तक प्रतिवर्ष निर्यात में 10 प्रतिशत औसत वृद्धि भी सुनिश्चित की जाएगी। इस घटक में प्रभावी तालमेल और संवर्द्धन गतिविधियों के लिये एक तकनीकी वस्त्र निर्यात संवर्द्धन परिषद की स्थापना की जाएगी।

चतुर्थ घटक

  • शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा
  • मिशन के इस चरण के तहत उच्चतर इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी स्‍तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा और इसके अनुप्रयोग का दायरा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, जलीय कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों तक विस्तृत किया जाएगा। साथ ही कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और मानव संसाधन को अत्यधिक कुशल बनाया जाएगा ताकि परिष्कृत तकनीकी वस्त्र विनिर्माण इकाइयों की आवश्यकता पूरी की जा सके।

उप-घटक

  • अनुसंधान का उपघटक जैव अपघटनीय तकनीकी कपड़ा सामग्री के विकास पर केंद्रित है विशेष रूप से कृषि वस्त्रों (agro-textile), भू-कपड़ा (geo-textile) और चिकित्सा कपड़ा (medical textile) के लिए।यह चिकित्सा और स्वच्छता कचरे के सुरक्षित निपटान पर जोर देने के साथ ऐसे उपयुक्त उपकरण का भी विकास करेगा जो प्रयोग हुए वस्त्र तकनीकी का पर्यावरणीय रूप से स्थायी निपटानकर सके।
  • तकनीकी वस्त्रों के लिए स्वदेशी मशीनों व प्रक्रियाओं के उपकरणों का विकास करने का उद्देश्य, इस अनुसंधान प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण उप-घटक है

महत्त्व

  • स्व-विश्वसनीय बनाना: यह कदम देश को तकनीकी वस्त्रों में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थान देगा।जिससे तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में भारत आत्म-निर्भर बनेगा और अगले एक वर्ष के भीतर भारत के व्यापार घाटे पर तकनीकी वस्त्र के बोझ को कम करेगा।
  • समग्र विकास और विकास: कृषि, जलीय कृषि, डेयरी, मुर्गी पालन, जलजीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत में तकनीकी वस्त्रों का उपयोग लागत अर्थव्यवस्था, जल और मिट्टी संरक्षण, बेहतर कृषि उत्पादकता और उच्च आय में समग्र सुधार लाएगातथाभारत में विनिर्माण और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

तकनीकी वस्त्र

  • तकनीकी वस्त्र,वस्त्र सामग्री और उत्पाद हैं जो मुख्य रूप से सौंदर्य विशेषताओं के बजाय तकनीकी प्रदर्शन और कार्यात्मक गुणों के लिए निर्मित होते हैं।
  • तकनीकी कपड़ा उत्पादों को 12 व्यापक श्रेणियों में बांटा गया है - एग्रोटेक, बिल्डटेक, क्लोथेक, जियोटेक, हेमेटेक, इंडुटेक, मोबिलटेक, मेडिटेक, प्रोटेक, स्पोर्टटेक, ओकेटेक और पैकटेक।

तकनीकी वस्त्र के लिए कच्चा माल

  • प्राकृतिक फाइबर: कपास, रेशम, सीसल (एक प्रकार का पौधा), रेक्स, ऊन
  • मैन मेड फाइबर्स एंड पॉलिमर: विस्कस, पॉलीरिटाइड, पॉलीओलफिन, फ्लैक्स, पॉलिएस्टर, एरामिड, UMHW पॉलीथाइलीन, कार्बन, ग्लास

अनुप्रयोग

  • तकनीकी वस्त्रों में विविध क्षेत्रों में विशेष अनुप्रयोग होते हैं जैसे कि आग प्रतिरोधी वाष्प, बुलेटप्रूफ जैकेट, अत्यधिक ऊंचाई वाले लड़ाकू गियर, साथ ही साथ अंतरिक्ष में इस्तेमाल किये जाने वाले वस्तुओं का उत्पादन। इनका उपयोग ऑटोमोबाइल और चिकित्सा उद्योगों में भी किया जाता है।

भारतीय तकनीकी वस्त्र उद्योग

  • भारत में तकनीकी कपड़ा उद्योग आयात पर निर्भर है। कई उत्पाद जैसे विशेष फाइबर / यार्न, चिकित्सा प्रत्यारोपण, सैनिटरी उत्पाद, सुरक्षात्मक वस्त्र, सीट बेल्ट के लिए वेबिंग, आदि वस्तुएं ज्यादातर आयात किए जाते हैं।
  • कपड़ा मंत्रालय द्वारा तकनीकी कपड़ा उद्योग के बेसलाइन सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय तकनीकी वस्त्र उद्योग को 2017-21 में 1,16,217 करोड़ रूपये से 2020-21 तक 2,00,823 करोड़ रूपये के चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से 20 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।

भारतीय तकनीकी वस्त्र उद्योग का विश्लेषण

ताकत

  • युवा और सस्ते जनशक्ति की उपलब्धता: भारत में दुनिया में सबसे बड़ी कामकाजी उम्र की आबादी (15 से 64 वर्ष की आयु के लोग) है। देश की वर्तमान जनसांख्यिकी के आधार पर, 2055 तक पर्याप्त कार्यबल के काम करने की उम्मीद है। अपेक्षाकृत कम औसत श्रमशक्ति लागत के साथ पर्याप्त कार्यबल भारत को प्रमुख वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में एक अलग बढ़त प्रदान करता है।
  • मजबूत वस्त्र मूल्य श्रृंखला: भारत,चीन के अलावा इस क्षेत्र में एकमात्र देश है जो प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों प्रकार के फाइबर में संपूर्ण कपड़ा मूल्य श्रृंखला (entire textile value chain)रखने वाला है। तकनीकी वस्त्र के लिए कच्चे माल की उपलब्धता के कारणभारत, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों द्वारा प्रस्तुत अवसरों को भुनाने के लिए अच्छी तरह से तैयार है।
  • सरकार से सक्रिय प्रोत्साहन: सरकार भारत में तकनीकी वस्त्रों के विकास के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस उद्देश्य के लिएभारत सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं जैसे- तकनीकी वस्त्रों के वृद्धि और विकास के लिए योजना (SGDTT), तकनीकी वस्त्रों पर प्रौद्योगिकी मिशन (TMTT), उत्तर पूर्व क्षेत्र में कृषि-वस्त्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए योजना, उत्तर पूर्व क्षेत्र में भू-तकनीकी वस्त्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए योजना, प्रौद्योगिकी उन्नयन धन योजना (TUFS) और एकीकृत कपड़ा पार्कों (SITP) के लिए योजना इत्यादि।
  • विनिर्माण ढांचे की उपलब्धता: भारत तेजी से बढ़ती हुई औद्योगिक अर्थव्यवस्था है, जिसमें भूमि, बिजली, पानी, श्रमशक्ति और उद्योगों के लिए अनुकूल नियामक ढांचा जैसे महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध हैं। मांग को बढ़ाने के लिए एक आकर्षक और बढ़ते बाजार के साथ-साथ तकनीकी वस्त्र निर्माण की स्थापना आसानी से की जा सकती है

कमजोरियां

  • वर्तमान मेंमशीनों के लिए आयात पर निर्भरता:भारत में तकनीकी वस्त्र उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त अधिकांश मशीनें उपलब्ध नहीं है। तकनीकी वस्त्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिएसरकार को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उच्च तकनीक मशीनरी के विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
  • अंतिम उपयोगकर्ताओं में तकनीकी वस्त्र की वस्तुओं की जानकारी की कमीं:भारत में तकनीकीवस्त्र की वस्तुओंके अधिकांश उपयोगकर्ता अभी भी ऐसे वस्तुओं के इस्तेमाल से होने वाले फायदों से अनजान हैं, इसके चलते ऐसे वस्तुओं के इस्तेमाल में कमी है।
  • मानकीकरण और संबंधित विनियमों का अभाव: वर्तमान मेंकई तकनीकी कपड़ा उत्पादों में मानक बेंचमार्क नहीं हैं,जिसके परिणामस्वरूप उप-मानक सस्ते उत्पाद उपलब्ध हैं। इसके अलावातकनीकी कपड़ा उत्पादों की मांग को बढ़ाने के लिए उद्योगों में सुरक्षा और अन्य संबंधित नियमों को लागू करने की आवश्यकता है।
  • स्पेशल फाइबर्स का छोटा या कोई घरेलू विनिर्माण नहीं: वर्तमान मेंभारत में बहुसंख्यक विशेष प्रकार के फाइबर आयात किए जाते हैं, इस प्रकार यह भारत को उच्च मूल्य वाले तकनीकी वस्त्र उत्पादों में विश्व स्तर पर अप्रतिस्पर्धी बना देता है।

सुझाव के उपाय

  • अंत-उपयोग अनुप्रयोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना
  • मानकीकृत तकनीकी वस्त्र उत्पादों के उपयोग का समर्थन करने वाले नियामक सुधार
  • मानकों का विकास और कार्यान्वयन
  • तकनीकी कपड़ा उत्पादों के लिए
  • तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ाना
  • उद्यमिता प्रशिक्षण के लिए तकनीकी वस्त्रों पर समर्पित पाठ्यक्रम
  • कुशल जनशक्ति की उपलब्धता में सुधार
  • उच्च प्रदर्शन विशेषता फाइबर के स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना
  • संस्थागत खरीद को बढ़ावा देना
  • तकनीकी वस्त्र मशीनरी का प्रोत्साहन उत्पादन
  • प्रौद्योगिकी गहन तकनीकी वस्त्रों के निर्यात को बढ़ावा देना

आगे का रास्ता

  • भारत में तकनीकी कपड़ा उद्योग के भविष्य का एक सकारात्मक दृष्टिकोण है और घरेलू बाजार मेंइसकी मजबूत खपत दर के साथ-साथ निर्यात की बढ़ती मांग को प्रतिबिंबित करता है।

उचित उपायों के साथ, उद्योग में तकनीकी वस्त्र निर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है और साथ ही अगले कुछ वर्षों में सरकार की 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दृष्टि में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

स्रोत : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ऑनलाइन. फरवरी 2020