प्रधानमंत्री किसानसंपदा योजना(PMKSY)

  • हाल ही में केंद्रसरकार ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY)के तहत 32 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
  • इस परियोजना का विस्तार देश के 17 राज्यों के 100 से अधिक कृषि जलवायु क्षेत्रों तक हुआ है।

प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना के बारे में

  • केंद्र द्वारा संचालित SAMPADA (कृषि-समुद्री प्रसंस्करण और कृषि-प्रसंस्करण समूहों के विकास के लिए योजना) योजना को मई 2017 में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था।इसका अनुमोदन 14वें वित्त आयोग द्वारा 2016-20 तक के लिए किया गया था
  • 2017 में SAMPADA का नाम बदलकर प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (PMKSY) कर दिया गया।

उदेश्य

  • प्रधानमंत्री किसान सम्‍पदा योजना (PMKSY) का उद्देश्‍य कृषि में हो रही क्षतियों को कम करना,प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की प्रक्रिया को आधुनिक बनाना, कृषि की कमियों को पूर्ण करना

PMKSY के तहत निम्नलिखित योजनाएं

  • मेगा फूड पार्क
  • एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य परिवर्धन अवसंरचना (Infrastructure)
  • खाद्य प्रसंस्करण / संरक्षण क्षमता का सृजन / विस्तार (इकाई योजना)
  • कृषि-प्रसंस्करण समूहों के लिए अवसंरचना
  • बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का निर्माण
  • खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना
  • मानव संसाधन और संस्थान
  • ऑपरेशन ग्रीन्स

लाभ

  • यह एक व्यापक पैकेज है, जिसके परिणामस्वरूप खेत से लेकर खुदरा दुकान तक कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
  • यह देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास की गति को तेज करेगा।
  • यह किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान करने में मदद करेगा और किसान की आय को दोगुना करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा।
  • यह कृषि उत्पादों के अपव्यय को कम करने, प्रसंस्करण स्तर को बढ़ाने, उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत पर सुरक्षित और सुविधाजनक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ाने में भी मदद करेगा।

भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र

  • विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के भीतर मूल्यवर्धन की अपार संभावनाओं के कारण खाद्य क्षेत्र एक उच्च-विकास और उच्च-लाभ क्षेत्र के रूप में उभरा है।
  • प्रसंस्कृत खाद्य बाजार 2016 में 322 करोड़ डॉलर से6% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) सेबढ़कर 2020 तक 543 करोड़ डॉलर तक होने की उम्मीद है।
  • यह क्षेत्र कृषि मूल्य वर्धित (agricultural value-added)के11% और विनिर्माण मूल्य वर्धित (manufacturing value-added)के9% का योगदान करता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र संगठित क्षेत्र में कार्यबल का 12.8% और असंगठित क्षेत्र में कार्यबल का 13.7% का रोजगार उपलब्ध करता है।

खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए सरकार के उपाय

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है।
  • भारत में निर्मित खाद्य उत्पादों की ट्रेडिंग (ई-कॉमर्स सहित) के लिए सरकारी स्वीकृति मार्ग के माध्यम से 100% FDI की अनुमति है।
  • मेक इन इंडियापहल के तहतसरकारखाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। जिसके लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण, खाद्य अपव्यय में कमी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EODB)के उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालयके पास एक समर्पित निवेशक पोर्टल (dedicated investor portal) है, जिसमें संसाधन आधार, भूमि की उपलब्धता, राज्य की विशिष्ट नीतियां, राजकोषीय प्रोत्साहन इत्यादि जैसी कई जानकारी शामिल हैं, इन्हें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेशों को आकर्षित करने के लिए संभावित निवेशकों के साथ साझा किया जाता है।
  • जिसमें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए संसाधन आधार, भूमि की उपलब्धता, राज्य की विशिष्ट नीतियां, राजकोषीय प्रोत्साहन आदि जैसी जानकारी संभावित निवेशकों के साथ साझा की जाती है।
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006,मानव उपभोग के लिए पौष्टिक और स्वच्छ भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात के विनियमन को ध्यान में रखता है।

भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विश्लेषण

ताक़त

  • विभिन्न प्रकार के कच्चे माल और विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की प्रचुर उपलब्धता।
  • विभिन्न कृषि वस्तुओं जैसे दूध,समुद्री उत्पाद,फल और सब्जियांआदि का अग्रणी उत्पादक।
  • केंद्र सरकार द्वारा दी गई कृषि-प्रसंस्करण के लिए प्राथमिकता
  • बढ़ता हुआ घरेलू बाजार।
  • बढ़ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों से निकटता, जैसे- खाड़ी देशों, मध्य पूर्व के देशों आदि के साथ समुद्री मार्ग।

कमजोरियाँ

  • पर्याप्त अवसंरचनात्मक सुविधाओं (adequate infrastructural facilities) का अभाव,अर्थातबिजली,भंडारण,सड़क और रेल संपर्क इत्यादि।
  • आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी संख्या में बड़े बिचौलिये के चलते प्रत्येक स्तर पर हो रहे अपव्यय, मूल्य वृद्धि के लिए अग्रणी हैं। पूंजी प्रधान - कच्चे माल की मौसमी प्रकृति के कारण कार्यशील पूंजी की उच्च आवश्यकता।
  • अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और उद्योग के बीच स्थापित संबंधों का अभाव।

चुनौतियाँ

  • व्यापक राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति की कमी के कारण केंद्र और राज्य की नीतियों में असंगति पैदा हो रही है।
  • भूमि उपयोग के रूपांतरण (गैर-कृषि उपयोग अनुमति) की आवश्यकता के चलते भूमि अधिग्रहण में देरी
  • सरकार की मंजूरी के लिए लंबी प्रक्रियाएं
  • स्टार्ट अप्स तथा तकनीकी और नवाचारों का परीक्षण के सलाह के लिएअपर्याप्त सुविधाएं। प्रक्रियाओं और तकनीकियों पर लागू किये गए शोध का भी अभाव है।
  • विनिर्माण और पैकेजिंग की उच्च लागत उत्पादोंको वस्तुओं को महंगा कर रही हैं तथा यह आम आबादी के ख़रीद से बाहर है।
  • कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ावखाद्य उद्योगों में व्यावहारिकता के मुद्दे अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • क़र्ज़ का अपर्याप्त प्रवाह,विशेष रूप से कार्यशील पूंजी की आवश्यकता के लिए।
  • खाद्य प्रसंस्करण के लिए कुशल मानव शक्ति की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
  • खाद्य उद्योग द्वारा गुणवत्ता मानकों को अपनाने से भारतीय खाद्य उद्योग के ब्रांड मूल्य को घटा रहा है।
  • भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में बाजार खुफिया तंत्रका अभाव।

सुझाई गई कार्य योजना

  • पैन-इंडिया आधार पर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के प्रति एक समान दृष्टिकोण का पालन करने के लिए एक राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति तैयार की जा सकती है।
  • सीधे किसानों से और किसान उत्पादक संगठनों सेकच्चे माल को खरीद कर खाद्य उद्योग के लिए गैर-कृषि भूमि का उपयोग करने की अनुमति।
  • सरकारी मंजूरी के लिएसभी राज्यों के लिएएक प्रकार का दृष्टिकोण होना चाहिए।
  • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रमें निवेश के सृजन को बढ़ावा देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को सस्ता क़र्ज़ प्रदान करना।
  • क्रेडिट गारंटी फंड का दायरा बढ़ाने / जोखिम कोष के निर्माण के ज़रिये इस क्षेत्र के वित्तपोषण से बैंकिंग उद्योग के तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहचान दिलाने के लिए एक राष्ट्रीय ब्रांड इक्विटी फंड का निर्माणजोउद्योग संघों औरभारत सरकार के योगदान से खाद्य उद्योग के लिए निर्मित किया जायेगा।
  • उत्पादन की लागत को कम करने के लिए मेक इन इंडिया के ज़रियेस्थानीय स्तर पर संयंत्र और मशीनरी और पैकेजिंग सामग्री के निर्माण पर ध्यान देना।

स्रोत : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ऑनलाइन, मार्च, 2020