कीटनाशक प्रबंधन बिल–2020

  • 12 फरवरी 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कीटनाशक प्रबंधन बिल–2020 को मंजूरी दी. इसे कीटनाशक प्रबंधन कानून 1968 को प्रतिस्थापित करके निर्मित किया गया है.जो कीटनाशक की कीमतों को निर्धारित करेगा. साथ ही साथ इस क्षेत्र को विनियमित करने के लिए एक प्राधिकरण भी स्थापित करेगा.

उद्देश्य

  • कीटनाशकों के व्यवसाय को विनियमित करना और देश में जैविक कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा देना.

आवश्यकता

  • भारत में कीटनाशकों के नियमन आज भी कीटनाशक अधिनियम 1968 जैसे पुराने कानून के आधार पर होता है. जिसका विकास न तो आधुनिक कीट प्रबंधन विज्ञान के साथ हुआ और न ही वैज्ञानिकों द्वारा कृत्रिम कीटनाशकों के दुष्प्रभाव के बारे में दिए गए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए.
  •  भारत के आठ राज्य (आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा) देश में इस्तेमाल किए जाने वाले 70% से अधिक कीटनाशकों का उपभोग करते हैं. फसलों में कीटनाशकों की खपत अधिकतम धान (26-28%) और कपास (18-20%) में होती है. 
  • तीव्र कीटनाशक विषाक्तता से होने वाली मौतों व अस्पताल में भर्ती होने को लेकर खेतिहर किसान अभी तक अज्ञानता केशिकार हैं. जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से सिर्फ इंसानों को ही नहीं बल्कि वन्यजीवों और पशुओं में भी नियमित रूप से विषाक्तता की मात्रा बढ़ रही है.

पृष्ठभूमि

  • केंद्र ने मौजूदा कीटनाशक अधिनियम 1968 को बदलने के लिए फरवरी 2018 में कीटनाशक बिल का एक मसौदा जारी किया था. मसौदा विधेयक में प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री पर जुर्माना बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने और पांच साल तक की जेल की सजा का प्रस्ताव किया गया था.जबकि इससे पहले 2,000 रुपये का जुर्माना और तीन साल तक की जेल का प्रावधान था.
  • हालांकि 2018 में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने विधेयक की आलोचना की और बताया कि
  1. कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति दोनों में राज्यों को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करता है.
  2. कीटनाशकों पर राज्यों को अंतिम निर्णय लेने के लिए कहना चाहिए.क्योंकि वेकृषि-पारिस्थितिक जलवायु, पर्यावरण और मिट्टी की स्थिति पर सबसे अच्छी समझ रखते हैं।


प्रमुख विशेषताऐं

  • पूर्ण जानकारी: यह किसानों को कीटनाशकों की ताकत और कमजोरी के बारे में सभी जानकारी प्राप्त करने के लिए सशक्त करता है.संकट और विकल्प की सूचनाओं का आंकड़ाखुले स्त्रोतों व समस्त भाषाओं में उपलब्ध होगा. पर्यावरण पर कीटनाशक के संभावित प्रभावों का विवरण भी जानकारी में शामिल किया जायेगा.
  • क्षतिपूर्ति का प्रावधान: हानिकारक कृषि रसायनों अथवाकम गुणवत्ता वाले कीटनाशकोंके प्रयोग से नुकशान की स्थिति में यह किसानों को मुआवजा प्रदान करता है. यदि आवश्यक हुआतो मुआवजे का ख्याल रखने के लिए सरकार एक केंद्रीय कोष बनाएगी.
  • पंजीकरण की आवश्यकता: कोई भी व्यक्ति जो कीटनाशक का आयात- निर्यात या निर्माण करना चाहता है तो उसे इस नए बिल के तहत पंजीकरण कराना आवश्यक होगा. कीटनाशक को लेकर किये गए किसी भी प्रकार के दावे, अपेक्षित प्रदर्शन, प्रभावकारिता, सुरक्षा और उपयोग के निर्देशों के बारे में सम्पूर्ण विवरण देने होंगे होंगे. इसके साथ उस बुनियादी ढांचे के बारे में भी जानकारी देनी होगी जिसमें कीटनाशक के स्टॉक को रखा जाएगा।
  • सख्त नियामक मानदंड: कीटनाशक से संबंधित विज्ञापनों को विनियमित करना इस बिल का इरादा है ताकि निर्माताओं को अपने उत्पादों के बारे में झूठे दावे करने से रोका जा सके.

प्रभाव

  • सतत विकास का मार्ग: यह भारत में कीटनाशकों को लेकर मौजूदा नियामक शासन की कई कमियों को ठीक करने व हमारे खाद्य और कृषि प्रणालियों को भी ठीक करने का अवसर प्रदान करेगा.जिससे देश, सतत विकास की ओर अग्रसर होगा.

स्रोत : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ऑनलाइन. फरवरी 2020