शहरीकरण प्रवृत्तियाँ एवं शहरी शासन सुधार

भारत तीव्र गति से अर्ध-शहरी से शहरी समाज की ओर संक्रमण कर रहा है। अनुमान है कि 2030 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में शहरों का योगदान लगभग 75% हो जाएगा। इस परिदृश्य में शहरी शासन का केंद्रबिंदु अब केवल सेवा-प्रदाय तक सीमित न रहकर ‘वित्तीय स्वायत्तता और दीर्घकालिक स्थिरता’ की ओर स्थानांतरित हो चुका है। इसके अंतर्गत शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies–ULBs) को नगरपालिका बॉन्ड जैसे ऋण-योग्यता सुधारों और 15वें वित्त आयोग द्वारा संपत्ति कर सुधारों से जुड़े परिणाम-आधारित वित्तपोषण के माध्यम से सशक्त किया जा रहा है।

प्रभावित वर्ग

  • नगर निगम (Municipal Corporations): जल ....

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